अंधा कानून और बेहरी सरकार

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पांच माह के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुजरिमों को सजा सुनाई सुनाई है। खुलम खुल्ला दिन दहाड़े निकिता तोमर का दो कातिलों ने अपहरण करने का प्रयास किया। निकिता ने विरोध किया तो उसकी कनपटी और उसके आसपास कई गोलियां मारी। वीडियो फुटेज के अलावा और भी पुख्ता तथ्य मिले। फिर भी कोर्ट का फैसला सिर्फ कातिलों को उम्र कैद तक सीमित रहा। कोर्ट का इस तरह का निर्णय और सरकार का कानून में लचीलापन अपराधियों और लुक्कों के हौसले बढ़ा रही है।

हरियाणा के फरीदाबाद में तौसीफ ने 26 अक्टूबर को बी.कॉम फाइनल ईयर की छात्रा सोहना निवासी निकिता तोमर की अग्रवाल कॉलेज के बाहर गोली मारकर  हत्या कर दी थी,। वह परीक्षा देकर शाम करीब पौने चार बजे कॉलेज से बाहर निकल रही थी। तौसीफ उससे शादी करने का दबाव बना रहा था। निकिता का कार सवार तौसीफ और रेहान ने अपहरण करने की कोशिश की। यह सब कुछ वीडियो कैमरे में कैद हुआ। वहाँ मौजूद लोग मूकदर्शक बनी रहे। हत्यारे असलाह लहराते हुए कार में सवार होकर भाग जाने में सफल हुए। फिर भी कोर्ट के इस तरह के फैसले पर कई तरह के सवाल खड़े हुए हैं। सवाल यह भी उठता है ऐसे अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे। निर्णय जल्द आया, इसका स्वागत है। लेकिन कातिलों को फांसी से रोका, यह सरकार की नीति पर भी सवाल खड़ा करता है, क्योंकि इसमें सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए किस तरह कानून में संशोधन किया है। वैसे हरियाणा के गृह मंत्री ने कहा कि इस मामले में हमने 24 घंटे में मुजरिमों को पकड़ा और 11 दिन के अंदर 700 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया। पांच माह के भीतर मुजरिमों को अदालत ने सजा सुनाई है। अब मृत्युदंड के लिए उच्च न्यायलय में अपील करेंगे। गौरतलब है कि हरियाणा के फरीदाबाद में तौसीफ ने 26 अक्टूबर को बी.कॉम फाइनल ईयर की छात्रा सोहना निवासी निकिता तोमर की अग्रवाल कॉलेज के बाहर गोली मारकर  हत्या कर दी थी,। वह परीक्षा देकर शाम करीब पौने चार बजे कॉलेज से बाहर निकल रही थी। तौसीफ उससे शादी करने का दबाव बना रहा था। निकिता का कार सवार तौसीफ और रेहान ने अपहरण करने की कोशिश की।

लेखक राजीव शर्मा दैनिक जागरण, नईदुनिया समेत कई समाचार पत्रों में रिपोर्टर रह चुके हैं।

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