अमुवि: प्रवेश के लिए आवेदन का समय बढ़ाया, लगेगा और शुल्क

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अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के विभिन्न पाठयक्रमों में प्रवेश के लिये आनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 300 रूपये विलम्ब शुल्क के साथ बढ़ा दी गई।
परीक्षा कंट्रोलर श्री मुजीब उल्लाह जुबैरी ने बताया है कि बीएससी/बीकाॅम, बीए, बीएएलएलबी, बीए (आनर्स फारेन लैंग्वेजेज), कक्षा 11/डिप्लोमा इंजीनियरिंग, कक्षा गयारह (हयूमैनिटीज़), सीईटी, डिप्लोमा इन जनरल नर्सिंग एण्ड मिडवाइफरी, बीएससी आनर्स, एग्रीकल्चरल (एसएफएस), बीटैक, बीआर्क, एमबीए, एमटीए, एमबीए (आईबी), एमबीए (आईबीएफ), बीएड, एमबीए (एग्री बिजनेस) एमएससी (बायोटेक्नालोजी) एमसीए, बीलिब आईएससी, एमए (मास कम्यूनिकेशन), बीई तथा समस्त विभागीय टेस्ट पाठयक्रमों में प्रवेश के लिये सात मार्च तक 300 रूपये विलम्ब शुल्क के साथ आनलाइन आवेदन जमा किये जा सकते हैं।
उन्होंने बताया है कि बीयूएमएस/प्रीतिब के लिये 12 मई तथा एमटैक और नान टेस्ट पाठयक्रमों के लिये 18 अप्रैल तक आवेदन जमा किये जा सकते हैं।
विभागाध्यक्ष बने रिज़वी
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के कृषि विज्ञान संकाय के प्लांट प्रोटेक्शन विभाग के प्रोफेसर परवेज कमर रिज़वी विभाग के नये अध्यक्ष बन गये हैं। उनका कार्यकाल 30 जून 2022 तक होगा।
खत्म हो रही सँस्कृति
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के अंग्रेजी विभाग में यूजीसी एसएपी डीआरएस फेस-2 कार्यक्रम के तहत विखंडित समाज में अनुवाद विषय पर आयोजित व्याख्यान को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर रीता कोठारी ने कहा कि एक विखंडित समाज में जहां हिंसा दैनिक जीवन का भाग बन जाती है वहां अनुवाद में बोलियां भाषा बन जाती है। उन्होंने सिंधी भाषा और संस्कृति से विभिन्न उदाहरणों को उदृत करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सिंधी समाज और संस्कृति अपनी जड़ों से कट गई। भौगोलिक सिंध का क्षेत्र जो वर्तमान पाकिस्तान में था। इसलिये लगभग 25 प्रतिशत सिंधी हिन्दू अल्पसंख्यक पलायन करके गुजरात आ गये।
उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तानी सिंधी समाज स्वंय को अलग महसूस करने लगा और इस समुदाय ने मुसलमान या पाकिस्तान से आने वाले नागरिक की डर से सार्वजनिक स्थलों पर सिंधी भाषा का इस्तेमाल रोक दिया। इससे भारत में सिंधी भाषा का आधार खत्म हो गया।
प्रोफेसर कोठारी ने अनुवाद में अंग्रेजी भाषा की भूमिका पर भी चर्चा की। जिसमें क्षेत्रीय भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद करने वाले व्यक्ति को अनुवाद और लिप्यंतरण में एक संतुलन बनाये रखना होता है। उन्होंने कहा कि अनुवादक को इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि किन शब्दों का अनुवाद करें और कि शब्दों को छोड़ दें ताकि भावार्थ के साथ साथ क्षेत्र की भाषा भी आत्मा भी बरकरार रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर एसएन जेबा ने कहा कि अनुवादक का कार्य बहुत अहम होता है क्योंकि इसे अनुवाद की जाने वाली भाषा और इसकी संस्कृति को दूसरी भाषा और इसकी संस्कृति में स्थानांतरित करना होता है। अंग्रेजी विभाग के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफेसर राहत उल्लाह खान ने स्वागत भाषण दिया और प्रोफेसर विभाग शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन तथा उपस्थितजनों का आभार जताया।
अलीगढ़ 3 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के लैण्ड एण्ड गार्डन्स विभाग द्वारा आगामी 7-8 मार्च को वार्षिक पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन गुलिस्ताने सैयद में किया जा रहा है। एएमयू लैण्ड एण्ड गार्डन विभाग के प्रभारी प्रो. जकी अनवर सिद्दीकी ने कहा है कि 6 मार्च को प्रतिभागी अपने गमले गुलिस्ताने सैयद में जजिंग के लिये लगायेंगे तथा 7 मार्च को प्रातः 8 बजे से 9.30 बजे तक गमलों की जजिंग होगी और 10 मार्च को पुष्प प्रदर्शनी का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर करेंगे।
प्रोफेसर सिद्दीकी ने बताया कि 8 मार्च को प्रदर्शनी का समापन होगा जिसमें दोपहर 3.30 बजे विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जायेगा। उन्होंने बताया कि 9 मार्च को दोपहर 3 बजे गुलिस्ताने सैयद पार्क पर फूलों के गमले विक्रय के लिये रखे जायेंगे। इच्छुक व्यक्ति पार्क पहुंच कर विभाग द्वारा तैयार गमलों को खरीद सकते हैं।
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के सेंटर फार एडवांस्ड स्टडीज इतिहास विभाग द्वारा भारतीय पुरातत्व विषय पर सप्ताह भर की कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें इतिहास विभाग और म्यूजियोलोजी विभाग के 118 छात्र व छात्राओं ने भाग लिया। व्याख्यान से दी जानकारी
कार्यशाला के दौरान विभिन्न व्याख्यानों के अलावा प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किये गये जिसमें पुरातत्व सामग्री को साफ करने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब, प्रोफेसर शीरीं मूसवी, इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अली नदीम रेजावी, प्रोफेसर मानवेन्द्र कुमार पुण्ढीर और प्रोफेसर एस जाबिर रजा ने व्याख्यान दिये। जबकि लुबना इरफान और डा. बनानी भट्टाचार्य ने भी कार्यशाला में व्याख्यान प्रस्तुत किये। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि पुरातत्तविक स्थानों पर किस प्रकार से खुदाई की जाती है।
कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों को अलीगढ़ किले का भ्रमण कराया गया। इस किले का निर्माण 1524-25 में हुआ था। लेकिन मुगल गवर्नर नवाब नजफ अली खान के कार्यकाल में यह अलीगढ़ किले के रूप में मशहूर हुआ। बाद में पूरे शहर का यही नाम पढ़ गया। इस किले का इतिहास और निर्माण की तकनीक के अलावा प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि एक आर्केलोजिस्ट इसकी नापतोल कैसे करेगा और ग्राउंड प्लान कैसे तैयार करेगा। अंत में प्रोफेसर रेजावी और प्रोफेसर पुण्ढीर ने प्रतिभागियों को सर्टीफिकेट वितरित किये।
कवि छात्रों को किया पुरुस्कृत
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के प्रौढ़ शिक्षा एवं सतत विस्तार केन्द्र और परिवर्तन के लिये 100 हजार कवि नामक संगठन के संयुक्त तत्वाधान में छात्रों के लिये काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विभागों से सम्बन्धित विशेषज्ञों की उपस्थिति में 12वीं कक्षा तक के छात्र व छात्राओं ने भाग लिया और अपनी कविताऐं प्रस्तुत कीं। सफल छात्र व छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किये गये।
मुख्य अतिथि कालीकट यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रोफेसर अनवर जहां जुबेरी ने कहा कि बच्चों का जो सबसे स्वर्णिम समय होता है जब वह अपनी माँ के आंचल में या जब वह उसके करीब होते हैं। प्रशिक्षण के लिये यह क्षण इनके भविष्य के निर्माण के आधार को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी माँ उन्हें अल्लाम इकबाल की नज्में विशेष कर शिकवा व जवाबे शिकवा सुनाया करती थीं जिससे उनके भीतर शायरी का शोक पैदा हुआ।
स्कूल शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रोफेसर असफर अली खान ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल होने से साहित्यक व्यक्तियों से संवाद का अवसर प्राप्त होता है और यह हर्ष का विषय है कि एएमयू और उर्दू माध्यमों के स्कूली छात्र अंग्रेजी में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कामयाबी से सुकून मिलता है लेकिन स्तर में सुधार पैदा करने के लिये निरंतर प्रयासरत रहना चाहिये।
कल्चरल एजूकेशन सेंटर के समन्वयक प्रोफेसर सैयद सिराज अजमली ने कहा कि विश्व का सबसे भावनात्मक विषय माँ है और यहां छात्र व छात्राओं ने जिस अंदाज में इन भावनाओं को अपनी कविता में पेश किया है इससे ज्ञात होता है कि इनमें से ही कोई होगा जो समाज में परिवर्तन लाएगा।
प्रौढ़ शिक्षा एवं सतत विस्तार केन्द्र के निदेशक और फैकल्टी आफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के डीन प्रोफेसर मोहम्मद गुलरेज ने कहा कि वह छात्र भाग्यवान हैं जिन्हें यहां शिक्षा प्राप्त करने का अवसर हासिल हो रहा हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बड़ी तादाद में ऐसे बच्चे भी मौजूद हैं जो शिक्षा से वंचित हैं। एएमयू का प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र शिक्षा से वंचित छात्र व छात्राओं को शिक्षा के अलावा विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रहा है। प्रोफेसर गुलरेज ने केन्द्र की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हाई स्कूल के बाद छात्रों द्वारा स्कूल छोड़ने की समस्या एक बड़ा रूप धारण करती जा रही है।
सेंटर की उपनिदेशिका प्रोफेसर आयशा मुनीरा रशीदा ने उपस्थितजनों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र का यह प्रयास इन मायनों में बहुत अहम है कि उसने शिक्षा से वंचित युवक युवतियों को पुनः शिक्षा की ओर आकर्षित किया गया।
काव्य गोष्ठी के दौरान इंटरमीडिएट तक के छात्र व छात्राओं की काव्य प्रतियोगिताऐं भी आयोजित की गयीं। जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों ने हिस्सा लिया।
एएमयू सिटी गल्र्स हाई स्कूल की कौसर नूर, सैयद हामिद सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल के हुसैन जिबरान और एएमयू गल्र्स स्कूल की अदीबा जफर ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार हासिल किये। निर्णायक मण्डल में प्रो. कमलानंद झा सुश्री हुमैरा महमूद आफरीदी, डा. सुनिज कुमार शामिल थे।
परिवर्तन के लिये 100 हजार कवि की क्षेत्रीय प्रतिनिधि डा. अलीशा इबकार और लुबना इरफान ने संगठन के 2011 में स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और इसकी गतिविधियों से अवगत कराया।
इस अवसर पर वीमेन्स कालिज की प्रिन्सिपल प्रोफेसर नईमा खातून, प्रो. समीना खान, प्रो. नसीम अहमद, डा. विभा शर्मा, डा. नगमा इरफान, एसएम मुस्तफा, डा. सबीहा असलम, तनवीर जहां आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डा. शमीम अख्तर और डा. अय्यूब शबाब ने संयुक्त तौर पर किया। और उपस्थितजनों का आभार डा. शमीम अख्तर ने जताया।
अलीगढ़  । मुस्लिम विश्वविधालय के बेगम अजीज उन निंसा हाल में व्यक्तित्व निर्माण पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें ग्लोबल सोल्यूशन के संस्थापक और सीईओ अनुभव सिंह ने रिसोर्स पर्सन के तौर पर छात्राओं को संवाद की कला, प्रश्नों के उत्तर देने और प्रस्तुति की कला के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई। छात्राओं को व्यवहारिक तौर पर इसका अभ्यास भी कराया गया और वर्गों में संवादों की अदायगी भी कराई गयी।
हाल की प्रोवोस्ट प्रोफेसर सुबुही खान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की जबकि डा. अलीशा इबकार ने मेहमानों का स्वागत किया।
अलीगढ़ 3 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविधालय के फारेन लैंग्वेजेज विभाग में अध्ययनरत चीनी भाषा के पांच स्नाकोत्तर एवं स्नातक छात्रों को चैन्नई की साफ्टवेयर कंपनी जोहो कारपोरेशन ने कस्टयूमर सक्सेस इंजीनियर्स के पद के लिये चयनित किया है। इन छात्रों का चुनाव कैम्पस प्लेसमेंट भर्ती कार्यक्रम के दौरान किया गया।
चयनित छात्रों में जावेद खान, तंजील उर रहमान, मोहम्मद शेफ, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद अनस के नाम शामिल हैं। इनको प्रारंभिक तौर पर 7 लाख रूपये वार्षिक पैकेज प्रदान जायेगा।
जोहो टीम के सदस्यों ग्लोबल हैड रिक्रूमेंट मोहम्मद सुहैल, सीनियर एसोसिएट एचआर नटराजन लीडरशिप स्टाफ मेम्बर पीरामल और प्रीसेल्स मैनेजर साईवेंकट ने इस कैम्पस प्लेसमेंट ड्राइव के बाद कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर से भेंट की और उनसे एएमयू के छात्रों के प्रदर्शन एवं उनकी प्रतिभा को साझा किया। कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने टीम सदस्यों को अलीगढ़ आगमन पर उनका धन्यवाद दिया। उन्होंने टीम सदस्यों से कहा कि अन्य छात्रों को भी वह रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं।
इंटरनेशनल स्टडीज़ फैकल्टी के डीन प्रोफेसर मुहम्मद गुलरेज तथा ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट आफीसर श्री साद हमीद ने टीम सदस्यों के प्रति धन्यवाद देते हुए चयनित छात्रों को बधाई दी।

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