अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की खबरें

0
297
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीमेंस पाॅलीटेक्निक में ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट सेल द्वारा छात्राओं और शिक्षकों के लिए आन लाइन स्टार्टअप कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें विशेषज्ञों ने ए0डब्ल्यू0एस0 क्लाउड कम्पयूटिंग एण्ड इनफोरमेशन टेक्नालोजी की उपयोगिता और प्रासांगिकता पर चर्चा की और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट आफिस द्वारा ए0पी0पी0डब्ल्यू0ए0आर0एस0 नोएडा के सहयोग से आयोजित की गई और इसमें 110 छात्राओं तथा 15 शिक्षकों ने भाग लिया। आन लाइन स्टार्टअप कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए वीमेंस पाॅलीटेक्निक की प्रिंसपिल डा0 सलमा शाहीन ने कहा कि क्लाउड कम्पयूटिंग और आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस से सायबर सुरक्षा और अधिक सरल हुई है और बड़े-बड़े डेटा का गुणवत्तापूर्ण नियंत्रण का प्रबंध करना भी आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि क्लाउड कम्पयूटिंग द्वारा न्यूट्रल नेटवर्क और अन्य सुविधायें भी उपलब्ध होने लगी हैं। जिनका मोबाइल डिवाइसेज़ में भी प्रयोग हो रहा है। इसके अलावा उद्योगों में क्लाउड और क्लाउड ओटोमेशन को भी क्लाउड कम्पयूटिंग प्लेटफार्म के साथ एकीकृत किया जा रहा है ताकि विभिन्न कार्यो को तर्कसंगत बनाने के लिए लक्षित औद्योगिक गतिविधियों में इसका उपयोग किया जा सके।
डा0 सलमा शाहीन ने कोविड-19 के बाद शिक्षाविद्ो में क्लाउड कम्पयूटिंग के उपयोग पर बोलते हुए कहा कि चूूॅकि विश्वविद्यालयों की कक्षायें महामारी के चलते निलंबित हैं इस लिए छात्रों को शैक्षणिक नुकसान से बचाने के लिए शिक्षकों द्वारा क्लाउड स्पेस पर अपलोड किये गये नोट्स, वीडियो और प्रस्तुतियों उन तक पहुॅचाई जा रही हैं।
ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट आफीसर (जनरल) श्री साद हमीद ने कहा कि दैनिक जीवन में आधुनिक एप्लीकेशन्स को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी ने देश में औद्योगिक क्रांति के बीज बोये है जिससे हर क्षेत्र में स्मार्ट टेक्नालोजी का प्रचलन बढ़ रहा है और नये रोजगारों के अवसर पैदा हो रहे हैं।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में ए0पी0पी0डब्ल्यू0ए0आर0एस0 टेक्नालोजीज के नेटवर्क इंजीनियर श्री गौरव द्विवेदी ने क्लाउड कम्यूटिंग का परिचय कराया और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के बारे में भी बताया।
वीमेंस पाॅलीटेक्निक के ट्रेनिंग एण्ड प्लेसमेंट आफीसर और कार्यशाला के समन्वयक डा0 जहाॅगीर आलम ने कम्पयूटिंग के बुनियादी ढ़ांचे और डेटा केन्द्रों पर चर्चा की।
सुश्री आमराह मरियम ने कार्यक्रम का संचालन किया जब कि कार्यशाला के आयोजन सचिव श्री तारिक अहमद ने उपस्थितजनों का आभार जताया।
अलीगढ़ । भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के0जी0 बालाकृष्णन आगामी 18 जुलाई को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विधि विभाग की अम्बेडकर चेयर फाॅर लीगल स्टडीज एण्ड रिसर्च द्वारा भारत में “महिलाओं का सशक्तीकरण और लैंगिक न्यायः समस्यायें और चुनौतियां“ विषय पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय ई-सेमिनार/वेबिनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर तथा डा0 अम्बेडकर फाउंडेशन के निदेशक डा0 दिबेन्द्र प्रसाद माझी भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। यह वेबिनार पूर्वाहन 11 बजे आरंभ होगा।
डाक्टर अम्बेडकर चेयर आॅफ लीगल स्टडीज़ एण्ड रिसर्च के इंचार्ज और कार्यक्रम के निदेशक प्रोफेसर जावेद तालिब ने बताया कि डाक्टर अम्बेडर फाउंडेशन, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित होने वाले इस वेबिनार में पूर्व मुख्य न्यायाधीश के अलावा एम0जी0एस0 यूनिवर्सिटी बीकानेर, राजस्थान के पूर्व कुलपति प्रोफेसर वी0 तायल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के विधि संकाय के डीन प्रोफेसर इकबाल हुसैन, जी0डी0 गोयंका यूनिवर्सिटी, सोहना, हरियाणा के सह कुपलति प्रोफेसर तबरेज अहमद तथा ए0एम0यू0 महिला अध्ययन केन्द्र की निदेशक प्रोफेसर अजरा मूसवी इस वेबिनार में रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लेंगी। प्रोफेसर जावेद तालिब ने बताया कि वेबिनार में महिलाओं और लैंगिक न्याय की प्रगति का विश्लेषण होगा और भारत में लैंगिक न्याय और महिला सशक्तीकरण के समक्ष पेश आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने यूनिवर्सिटी वेबसाइट कमेटी का पुनर्गठन किया है।
इस पुनर्गठित कमेटी में कम्पयूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर जमशेद सिद्दीकी, स्टेटिसटिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अतहर अली खान, आई0क्यू0ए0सी0 के निदेशक प्रोफेसर एम0 रिजवान खान, प्रोफेसर एम0एन0 फारूकी कम्पयूटर सेंटर के निदेशक डा0 परवेज महमूद खान, यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन डा0 मोहम्मद यूसुफ, प्रोस्थोडोंटिक्स विभाग के चेयरमैन डा0 गौरव सिंह, पीडियाट्रिक्स सर्जरी विभाग के चेयरमैन डा0 रिजवान अहमद खान, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन प्रोफेसर मिर्जा फैसल एस0 बेग तथा कम्पयूटर साइंस विभाग के डा0 आसिम जफर को शामि

अलीगढ़ 14 जुलाईः अलीगढ़ मुस्लि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने यूनिवर्सिटी पाॅलीटेक्निक में असिस्टेंट प्रोफेसर डा0 फर्रूख हफीज को डिसऐबिलिटी यूनिट का तत्काल प्रभाव से डिप्टी कोआर्डीनेटर नियुक्त किया है। डा0 हफीज का कार्यकाल एक वर्ष या अग्रिम आदेश तक प्रभावी रहेगा।
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय विधि संकाय की लाॅ सोसाइटी द्वारा “वैकल्पिक विवाद समाधान द्वारा न्याय का भूमण्डलीकरण” विषय पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय आभासी सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। सम्मेलन में अमेरिका, ब्राजील व इंडोनेशिया के वक्ताओं ने प्रतिभागियों का ज्ञान वर्धन किया तथा उन्हें वैकल्पिक विवाद समाधान (ए0डी0आर) के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप से परिचित कराया। सम्मेलन में लगभग 12 देशों के 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अमुवि कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान बिना मुकद्दमेबाजी के मतभेद के सिद्धान्तों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ए0डी0आर का सबसे उपयुक्त उदाहरण लोक अदालत है जहाॅ बहुत कम समय में विवाद का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ए0डी0आर के द्वारा वांछित परिणाम प्राप्त करने हेतु अत्यंत धैर्य, मनोवैज्ञानिक सोच तथा विषय के गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तर पर हो रहा है। और यह विधि के छात्रों के लिए यह एक अत्यंत सुनहरा अवसर है।
कांफ्रेंस में जैफ किचावेन, मेडिएटर, लारन, ऐन्जेलस, अमेरिका ने कहा कि “भूमण्डलीकरण के इस दौर में ए0डी0आर0 एक अत्यंत सुविधानजक विवाद समाधान का साधन बन चुका है अब आप सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी मध्यस्थता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के इस दौर में सोशल मीडिया ए0डी0आर0 में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ब्राजील के वक्ता प्रोफेसर मुस्तावी मिलेअर एलमेत्र, मेडीएटर एर्टोनी ने कहा कि ए0डी0आर सम्पूर्ण विश्व में न्याय प्रदान करने में सहायता प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक ए0डी0आर0 में प्रेक्टिस करने के लिए किसी दूसरे देश से करार की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में व्यवसायिक व पारिवारिक विधि में ए0डी0आर0 बहुत सुगमता से न्याय दिला रहा है।
कार्यक्रम के तीसरे वक्ता फहमी शहाब, डायरेक्टर पी0एम0एम0, मेडिएशन, सेंटर इन्डोनेशिया ने कहा कि मेडीएटर का कर्तब्य होता है कि वह पार्टी को मुद्दों को समझने व उन्हें सुलझाने में मदद करे।
आई0आई0एम0 की डायरेक्टर सुश्री इरम माजिद ने कहा कि ए0डी0आर0 के कारण न्याय प्राप्त करना अत्यंत आसान है तथा इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आप सम्पूर्ण विश्व में कहीं भी प्रेक्टिस कर सकते हैं। भारत में अभी भी ए0डी0आर0 विश्व की अपेक्षा धीमी गति से तरक्की कर रहा है परन्तु जल्दी ही यह बहुत बड़ा स्थान लेने वाला है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता एवं ला सोसायटी के अध्यक्ष प्रोफेसर एम0 शकील अहमद समदानी ने कहा कि ए0डी0आर0 भारत में किसी न किसी रूप में प्राचीनकाल से प्रचलित है। मध्ययुगीन भारत में भी यह प्रचलित था और आजादी के बाद भी यह भारत में प्रचलित है। लोक अदालत इसका ज्वलन्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमानों के पारिवारिक मामलों को निपटाने के लिए “दारूल-कज़ा“ भी स्थापित है जहाॅ बिना किसी शुल्क के और बहुत कम समय में पारिवारिक समस्याओं का निपटारा हो जाता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आव्हान किया कि वह ए0डी0आर0 को भी अपना पेशा बना सकते हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रेक्टिस कर सकते हैं। मेहमानों का स्वागत प्रोफेसर वसीम अली ने किया। जब कि धन्यवाद ज्ञापन विधि विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जहीरउद्दीन ने किया। प्रश्नोत्तरी सत्र मोडरेटर मोहम्मद नासिर, अस्सिटेंट प्रोफेसर ने संचालित किया।
कार्यक्रम का संचालन ला सोसायटी के सचिव अब्दुल्ला समदानी ने किया। तिलावते कुरान सदफ खान ने संयुक्त सचिव आयशा अल्वी ने मेहमानों का परिचय कराया। शुभव कुमार, पवन वाष्र्णेय और शोएब अली ने हास्ट की भूमिका निभाई।
आकाश रंजन गोस्वामी, हबीबा शेख, फौजिया एवं शेल्जा सिंह ने रिर्पोटर की भूमिका निभाई। कार्यकम को सफल बनाने में हुनैन खालिद, समारा हाशिम, चन्दन गुप्ता, यश अग्रवाल, सौम्बा गोयल, श्वेता शर्मा आदि का विशेष योगदान रहा।
अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीमेन्स कालिज में कामर्स के शिक्षक प्रोफेसर बाबू बख्श मंसूरी ने हाल ही में इंदिरागांधी नेशनल ट्राइब्यूनल यूनिवर्सिटी अमरकंटक (मध्य प्रदेश) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आन लाइन सेमिनार में कोविड से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों में “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एक मूल्याकंन“ पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
प्रोफेसर मंसूरी ने भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों और एम0एस0एम0आई0 के लिए वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज की आवश्यकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए एक वरदान साबित होगा। जो लाक डाउन के दौरान रूक गये थे तथा यह वृद्धि और विकास के नये अवसर पैदा करेगा और पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं की मांग को भी बढ़ायेगा। प्रोफेसर बख्श के शोध पत्र को बेहद सराहा गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here