ईमानदार व्यक्ति को सम्मान देते थे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

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पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह राज्य संचालन में परिपक्व थे। किसी भी दल के ईमानदार नेता या व्यक्ति के खिलाफ षड्यंत्र नहीं किया। ऐसे व्यक्ति का सदैव सम्मान किया करते थे। अपने पुराने साथी को कभी भूले नहीं। दूर से पहचान करने पर कुशलता भी पूछते रहे। खास बात यह भी थी मन के साफ थे और दो टूक कहते थे। जिसके साथ रहे उसका आखिर तक साथ दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पहली सभा वर्ष 1991 में अलीगढ़ के गांधी पार्क में देखी गईं। मै 1991 में यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा खैर के पास एक कॉलेज में दे रहा था। मेरे पिता जगदीश कुमार शर्मा सासनी के चेयरमैन के अलावा दैनिक हिंदुस्तान समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ भी थे। वे उस सभा की कवरेज करने गये और मुझे अपने साथ ले गये। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह उस समय सिर्फ विधायक थे। चूंकि भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार लगभग घोषित कर चुकी थी। फिर भी बाबूजी में घमंड नहीं था। वह लोगों के पास आकर मिलते रहे। सरकार भाजपा की पूरे बहुमत के साथ बनी और बाबूजी कल्याण सिंह पहली बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए। मेरे पिता कम्युनिस्ट हैं और निर्दलीय उम्मीदवार बनकर चेयरमैन पद का चुनाव 1971 से 2005 तक जीता जिसमें 1995 का चुनाव भाजपा से हारे लेकिन 2000 में फिर जीते। जब बाबूजी मुख्यमंत्री थे उस समय मेरे पिता सासनी से चेयरमैन थे। उस समय सासनी से विधायक और भाजपा ने मेरे पिता के खिलाफ मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से कई जांच कराई। डीएम से लेकर मण्डलायुक्त मेरे पिता के प्रति सकारात्मक रिपोर्ट देते रहे। उस समय अलीगढ़ के पत्रकारों में अमर उजाला से स्वर्गीय सतीश कुलश्रेष्ठ जी, दैनिक जागरण से सुधीर भारद्वाज जी, आज से श्री सुरेंद्र अग्रवाल जी और दैनिक जनतायुग से स्वर्गीय गिरीश शर्मा जी मेरे पिता के साथ लखनऊ गये। बाबूजी ने पूरे सम्मान के साथ एक गेस्ट हाउस में रुकने की व्यवस्था कराई। पत्रकारों से प्रतिदिन दो से तीन घण्टे मुलाकात करते थे और अपना इंटरव्यू  देते थे। आखिर में जांच पर बात कही तो बाबूजी के शब्द थे कि मै जानता हूं आप ईमानदार हैं। जांच रिपोर्ट मेरे पास आएगी। आप कोई चिन्ता नहीं करें। वही हुआ जो सत्ता पर बैठे न्यायाधीश को करनी चाहिए। ईमान जीता और जो जांच करा रहे थे वह खामोश हो गए।

बाबूजी की सादगी ऐसी थी किसी को वह बुलाते थे तो उसका पूरा सम्मान करते थे। अपने आवास पर मीठा और चाय पिलाकर ही भेजते थे। मैने दैनिक जागरण से उनकी कम से कम बीस सभाओं की रिपोर्टिंग की है। सासनी, सिकन्दराराऊ और अलीगढ़। वह जो बोलते थे एक दम दो टूक। भाजपा से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का गठन किया और सपा से गठबंधन हुआ। एमएलसी निकाय चुनाव में विधायक कृपाल सिंह प्रत्याशी घोषित किए। अलीगढ़ में सपा वाले विरोध कर रहे थे। उस समय मैने सिकन्दराराऊ में बाबूजी की सभा से पहले उन्हें रोका और सवाल करना चाहा। बाबूजी मुझे देखकर मुसकरगये बोले जो भी कहुंगाउसी में आपके जवाब मिल जाएंगे। वे सभा मे आये और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के लिए दो दूक कहा, यह चुनाव सपा और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का भविष्य तय करेगा। हुआ वही कृपाल सिंह चुनाव हार गए और बाबूजी ने सपा से गठबंधन तोड़ लिया। फिर वे भाजपा में गये।

बाबरी विध्वंस से पहले और बाद में राम मंदिर का संकल्प लिया। जो चुनाव प्रचार में वायदा किया वह बखूबी निभाया। राम मंदिर पर कभी पीछे नहीं हटे। हिंदुत्व पर उन्हें गर्व था। उसे बखूबी अंजाम देते थे। उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में कई विभागों में जमकर वेकेंसी निकली। उन्हें पारदर्शिता के साथ भरा गया। सिर्फ 10 नम्बर का इंटरव्यू रखा जिसमें आदेश दिया था दो अंक से कम किसी को देने नहीं है और 8 अंक से अधिक किसी को मिलेंगे नही। इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता रही। आज भी उस समय के चयनित उम्मीदवार गर्व से कहते हैं हम कल्याण सिंह के कार्यकाल में नोकरी पाने वाले हैं। कानून व्यवस्था में दबंगों की बोलती बंद कर दी गई थी। माफिया उत्तर प्रदेश छोड़ गए थे। अब बाबूजी नहीं रहे उन्हें शत शत नमन

लेखक राजीव शर्मा जो रानीतिक सटोरी के विशेषज्ञ है

9927006202

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