एएमयू देश में एक मिनी इंडिया: पीएम

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 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह के मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक ”मिनी इंडिया” का प्रतिनिधित्व करता है। इसका परिसर अपने आप में एक शहर जैसा है। हम विभिन्न विभागों, दर्जनों छात्रावासों, हजारों शिक्षकों और प्रोफेसरों के बीच एक मिनी इंडिया देखते हैं। जो विविधता हम यहां देखते हैं वह न केवल इस विश्वविद्यालय की बल्कि पूरे देश की ताकत है।
ज्ञात हो कि 1920 में स्थापित एएमयू ने उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं तथा प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल निशंक की उपस्थिति में एक विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया।
प्रधान मंत्री ने कहा कि एएमयू ने राष्ट्र-निर्माण में भरपूर योगदान दिया है तथा व्यापक और उच्च स्तरीय शोधों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम ऊंचा किया है।
उन्होंने कहा कि एएमयू में, यदि छात्र उर्दू में शिक्षा प्राप्त करते हैं, तो यहां वे हिंदी में पढ़ सकते हैं और यदि एक तरफ विश्वविद्यालय में अरबी का अध्ययन करते हैं, तो वे संस्कृत में भी अध्ययन और शोध करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में हिंदू, मुस्लिम और अन्य धर्मों के धार्मिक ग्रंथों को एक साथ संजोकर रखा गया है। यही भारत की सही परिकल्पना है तथा एएमयू हर दिन इस सिद्धांत पर काम करता है।
उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान ने कहा था कि जब आप शिक्षा प्राप्त करते हैं और कार्य क्षेत्र में आते हैं, तो आपको जाति, पंथ या धर्म को देखे बिना सभी के लिए काम करना चाहिए। यह एक ऐसी सोच है जिसे हमें सदा अपने साथ रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें विविधता की इस शक्ति को नहीं भूलना चाहिए और न ही इसे कमजोर होने देना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि ”एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में दिन-प्रतिदिन बलवान हो।
उन्होंने कहा कि एएमयू ने लाखों लोगों को तैयार किया है और उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक सोच प्रदान कर समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया है।
कोविड-19 के विरूद्ध देश की लड़ाई में अमुवि की भूमिका को स्वीकार करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा कि इस कठिन समय के दौरान, जिस तरह से एएमयू ने समाज की मदद की वह अभूतपूर्व है। हज़ारों लोगों का परीक्षण किया, आइसोलेशन वार्ड बनाए और पीएम-केयर फन्ड के लिए एक बड़ी धनराशि का योगदान दिया और यह दिखाया कि यहां से जुड़े लोग राष्ट्र के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम लड़कियों में स्कूल छोड़ने की दर 70 प्रतिशत से अधिक थी और यह स्थिति भारत में 70 वर्षों तक बनी रही। इन परिस्थितियों में सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की गाँवों में शौचालय का निर्माण किया और स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए शौचालय बनाए। अब यह दर गिरकर लगभग 30 फीसदी रह गई है।
उन्होंने कहा कि एएमयू में, उर्दू, अरबी और फारसी भाषा में किया गया शोध सराहनीय है। विशेष रूप से इस्लामी इतिहास में किए गए शोध, इस्लामी दुनिया में भारत की स्थिति को बढ़ाते हैं और उनके साथ भारत के संबंध को नई ऊर्जा देते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि एएमयू के पूर्व छात्र जहां भी जाते हैं समृद्ध विरासत और भारत की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैंैं।
प्रधान मंत्री ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगता है कि एएमयू के भवनों से शिक्षा का इतिहास भी जुड़ है जो भारत की मूल्यवान विरासत है। मैं अक्सर अपनी विदेश यात्राओं के दौरान एएमयू के पूर्व छात्रों से मिलता हूं, जो बहुत गर्व से कहते हैं कि उन्होंने एएमयू में अध्ययन किया है।
उन्होंने कहा कि देश उस रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, जहां हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के देश में हो रहे विकास का लाभ मिलेगा तथा हर नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकारों और उनके भविष्य के बारे में आश्वस्त होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि कोई भी नागरिक धर्म, जाति और पंथ के आधार पर ”सबका साथ, सबका विकास” के रास्ते पर नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर मिलेंगे।
प्रधानमंत्री ने एएमयू के छात्रों से ”वोकल फार लोकल”, न्यू इंडिया, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने कहा कि एएमयू के पूर्व छात्रों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय योगदान दिया था।
मानद अतिथि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि एएमयू ने 1920 में विश्वविद्यालय के रूप में अपनी स्थापना के बाद से एक लंबा सफर तय किया है और फ्रंटियर गांधी, खान अब्दुल गफ्फार खान तथा डा० जाकिर हुसैन जैसे भारत रत्न पैदा करने वाले राष्ट्र के प्रमुख भारतीय संस्थानों में से एक के रूप में उभरा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एएमयू के छात्रों और श्क्षिकों के ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान शामिल हैं तथा इसने राष्ट्र को कई वैज्ञानिक दिये हैं।
श्री निशंक ने कहा कि एएमयू ने 1920 में बेगम सुल्तान जहान को अपना पहला चांसलर बनाया था और यह उस समय में महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण था, जब महिलाओं को सार्वजनिक सेवाओं में बहुत कम स्थान दिया जाता था।
श्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि भारत के पास एक मजबूत नेतृत्व है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन से देश बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 शैक्षिक, व्यावसायिक और व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण का स्रोत बनेगा जबकि यह नीति पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र, मूल्यांकन और छात्र के अनुभवों को बढ़ाने के लिए कला तथा ज्ञान की धारणा को जोड़ने का प्रयास करती है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एनईपी 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए हमें अपने उच्च शिक्षण संस्थानों से बहुत आशाएं हंै और हम उनके निरंतर समर्थन की उम्मीद करते हैं।
श्री रमेश पोखरियाल ने कहा कि भारत विश्व गुरु (विश्व नेता) बनने की ओर अग्रसर है और यह हमारे शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे शिक्षा और विचारों के दायरे में आगे बढ़ें और हमारी बौद्धिक विरासत की समझ को दृढ़ बनाएं। उन्होंने कहा कि एएमयू से निकलने वाली शिक्षा की रौशनी नए भारत (न्यू इंडिया) के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी।
प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए एएमयू के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि हमारा विश्वविद्यालय न केवल अपनी स्थापना केे 100 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रहा है बल्कि 56 वर्ष के अंतराल के बाद देश के वर्तमान प्रधानमंत्री विश्वविद्यालय के समारोह में भाग ले रहे हंै।
उन्होंने कहा कि आज सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुसलमान शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास की  सीढ़ी के सबसे निचले पायेदान पर है जिनके उत्थान के लिए भारत सरकार तथा विभिन्न अन्य एजेंसियों की सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एएमयू अधिनियम की धारा 5 (2) सी के अंतर्गत इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी संभव उपाय करने का प्रयत्न कर रहा है तथा शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी एएमयू की अग्रणी भूमिका है।
कुलपति ने कहा कि श्री नरेंद्र मोदी एक दूरदर्शी नेता हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा के लिए समर्पित किया है और भारत और सभी भारतीयों को एक साहस भरा तथा अभिमानी दृष्टिकोण प्रदान किया है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने हम सभी के बीच संभावना और आशा का दीप प्रज्वलित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विविधताओं के बावजूद सदियों से हम  एकता के सूत्र मंे बंधे है और यही विशेषता भारत  को अनूठा बनाती है और यह पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है ।
प्रोफेासर तारिक मंसूर ने कहा कि प्रधानमंत्री के जीवन की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा दायक है। उनका जीवन अनुकरणीय कायांेर्, नैतिकता, समर्पण, कठिनाई तथा बाधाओं पर काबू पाने के उदाहरणों से भरा हुआ है। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत की छवि को ऊंचा करने में अहम भूमिका निभाई और अपने विजन और दूरदर्शिता के बल पर ही भारत ने पड़ोस की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और इसकी दुनिया भर में काफी सराहना भी हुई है ।
उन्होंने कहा कि मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारत पश्चिम एशियाई देशों के साथ-साथ अन्य विश्व शक्तियों के साथ भी अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने में सफल रहा है। आर्थिक रूप से गरीबों का कल्याण हमेशा प्रधानमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता है और उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई विभिन्न योजनाओं तथा सबका साथ सबका विकास की नीति में हमने यह देखा भी है ।
कुलपति ने कहा कि वह इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को नई शिक्षा नीति के लिए बधाई देते हैं। इससे भारत में शिक्षा प्रणाली में बदलाव आएगा। प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने कोविड-19 महामारी के समय में शिक्षा के क्षेत्र में सक्षम नेतृत्व प्रदान किया है ।
उन्होंने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक घटना पर हजारों पूर्व छात्रों सहित मुझे भी हमारे संस्थापक सर सैयद अहमद खान के प्रति गर्व और प्रेम की भावना महसूस होती है जो सच्चे देशभक्त थे। उन्हांेने कहा कि सर सैयद के जीवन के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप राष्ट्र की प्रगति के लिए समाज के सभी वर्गों के बीच भाईचारा और एकता पहली आवश्यकता है।
कुलपति ने कहा कि सर सैयद हिंदू मुस्लिम एकता के हिमायती थे जिसका उन्होंने व्यावहारिक रूप से प्रदर्शन भी किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एएमयू पारंपरिक क्षेत्रों में सीखने का एक बड़ा केन्द्र होने के अलावा आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षा प्रदान करने में भी सबसे आगे है ।
कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व की संस्था एएमयू को राष्ट्र की भलाई के लिए अपने विशेष, ऐतिहासिक और संवैधानिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए सभी से निरंतर सहयोग की आवश्यकता है। एएमयू ने अपने पूरे इतिहास में देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण के संघर्ष में भरपूर योगदान दिया है।
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि इस संस्था ने असंख्य परिवारों के जीवन और नियति को बदल दिया है, जिनमें से अधिकांश समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से ताल्लुक रखते हैं।
एएमयू के कुलाधिपति सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने कहा कि एएमयू ने न केवल खुद को प्रमुख भारतीय शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया है, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारतीय शिक्षा प्रणाली के मापदंड को भी ऊॅचा उठाया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ज्ञान प्राप्त करने तथा इसे दूसरों तक पहुॅवचाने पर जोर देता है। मुसलमानों का कर्तव्य है कि वे अपने ज्ञान से समाज और राष्ट्र का कल्याण करें। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के अनुकरणीय कार्यों की प्रशंसा की और उनके लंबे जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।
गत एक शताब्दी में एएमयू की उपलब्धियों पर बोलते हुए प्रोफेसर अली मोहम्मद नकवी (निदेशक, सर सैयद अकादमी) ने कहा कि एएमयू के प्रख्यात पूर्व छात्रों की सूची में भारत रत्न, पद्म पुरस्कार विजेता, राष्ट्राध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, प्रख्यात वैज्ञानिक, लेखक, कवि और स्वतंत्रता सेनानी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एएमयू ने डा0 सी वी रमन, दलाई लामा और प्रोफेसर तजाकी कजिता सहित कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं की मेजबानी की है।
प्रोफेसर नईमा खातून (प्राचार्य, महिला कालिज) ने कहा कि अमुवि की प्रथम चांसलर महिला होने से यह प्रमाणित है कि इस संस्था में महिला शिक्षा तथा महिलाअेां के सशक्तीकरण पर प्रारंभ से ही विशेष बल दिया जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला कालिज, महिला पॉलिटेक्निक तथा एक एडवांस महिला अध्ययन केंद्र महिलाओं को सशक्त बनाने में काफी योगदान दे रहे हैं ।
एएमयू के प्रो चांसलर नवाब इब्ने सईद खान तथा प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर जहीरुद्दीन भी आनलाइन कार्यक्रम में शामिल हुए। एएमयू रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद (आईपीएस) ने धन्यवाद प्रस्ताव किया। डा० फायजा अब्बासी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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