एएमयू :रमजान में घरों में पढ़े नमाज़ और तरावीह

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अलीगढ़ । अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाजिमे दीनियात प्रो. मोहम्मद सलीम ने कोरोना महामारी के दृष्टिगत सभी मुसलमानों से रमजान के दौरान होने वाली तरावीह को मस्जिदों की बजाय अपने घरों पर अदा करने का आग्रह किया है। प्रो. सलीम ने कहा है कि कुरान की शिक्षा की रोशनी में इंसान की जान और सेहत बहुत अमूल्यवान है इसीलिये इसकी रक्षा की कड़ी ताकीद की गई है। उन्होंने कहा है कि तरावीह नमाज फर्ज नहीं है और वर्तमान परिप्रेक्ष्य के दृष्टिगत लोग अपने घरों पर ही नमाजे तरावीह अदा कर सकते हैं। जिसके लिये हुक्म भी है।
नाजिमे दीनियात में सभी लोगों से आग्रह किया है कि नमाजे तरावीह अपने अपने आवासों पर अदा करें और मस्जिदों में जमात करने से बचें। उन्होंने कहा है कि विभिन्न इस्लामी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इस्लामी गण राज्य ईरान आदि देशों ने भी लोगों से रमजान के दौरान इस वर्ष अपने घरों पर नमाजे तरावीह पढ़ने के आदेश जारी किये।
एएमयू में चार दिन का टीचिंग कोर्स लांच
अलीगढ़ ।: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने एएमयू के शिक्षकों के लिये 4 दिवसीय आनलाइन टीचिंग कोर्स लांच किया है। असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिये दो सप्ताह के सब्जेक्ट रिफ्रेशर कोर्स और तीन सप्ताह के ओरियंटेशन कार्यक्रम के तौर पर इस कार्यक्रम में विस्तार भी किया जाएगा। इस कोर्स का आयोजन एएमयू के यूजीसी एचआरडी सेंटर ने एमएनएफ कम्प्यूटर सेंटर के सहयोग से किया है।
इस अवसर पर कुलपति ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत देश भर में लोकडाउन के दौरान आनलाइन शिक्षण समय की एक महती आवश्यकता है। ताकि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो सके। वेबेक्स मीट प्लेटफार्म के हवाले से अपने आवास से बोलते हुए प्रोफेसर तारिक मसंूर ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर पर है जिसका हमें लाभ उठाना चाहिये और छात्रों को इस बात के लिये प्रेरित करना चाहिए कि वह अपनी शिक्षा के लिये तकनीक पर भी खर्च करें और लैपटाप, स्मार्ट फोन और इंटरनेट का सकारात्मक प्रयोग करें।
यूजीसी एचआरडी सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर एआर किदवई ने बताया है कि इस कोर्स के लिये 820 शिक्षकों ने पंजीकरण कराया है जिनमें संकायों के डीन, कालिजों के प्रिन्सिपल, केन्द्रों के निदेशक तथा विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और शिक्षक शामिल हैं। कोर्स कोर्डीनेटर प्रोफेसर अब्दुर रहीम किदवई ने इंटेरेक्टिव आनलाइन सेशन तैयार किया है जिसके अनुसार वर्चुअल क्लासरूम पर डा. पीएम खान (डायरेक्टर एमएनएफ कम्प्यूटर सेंटर) गूगल क्लासरूम टीचिंग और असाइनमेंट पर डा. आसिम जफर (कम्प्यूटर साइंस विभाग) जो इस कोर्स के चीफ टेक्निकल कंसलटेंट भी हैं, मोडल्स पर डा. के श्री निवास (हैड आईसीटी, एनआईईपीए नई दिल्ली), आनलाइन वीडियो प्रजेंटेशन पर डा. एसएम खान (मनोविज्ञान विभाग) तथा ओईआर पर डा. जफर इकबाल (मौलाना आजाद लाइब्रेरी) के व्याख्यान होंगे।
इससे पूर्व डा. फायजा अब्बासी (असिस्टेंट डायरेक्टर यूजीसी एचआरडी सेंटर) ने आनलाइन टीचिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम का परिचय कराया और स्वागत किया।
अलीगढ़ 21 अप्रेलः: कोरोना महामारी की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मेडीकल अटेंडेंट स्कीम (एमएएस) में उपचार के लिए आने वाले रोगियों की संख्या को सीमित कर दिया गया है।
एमएएस के निदेशक प्रोफेसर हम्माद उस्मानी ने बताया है कि भारत सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी व दिशा निर्देशों का पालन करते हुए रोगियों को सामाजिक दूरी बनाये रखने के उद्देश्य से अब एमएएस में प्रतिदिन केवल दो सौ रोगियों को ही देखा जाएगा। उन्होंने बताया कि दो सौ रोगियों के पंजीकरण के बाद आने वाले रोगियों अगले दिन कार्य दिवस में देखे जाएगें।
प्रोफेसर उस्मानी ने स्पष्ट किया है कि बुखार, फलू, खांसी तथा नज़्ले से पीडित रोगियों का पहले से ही एमएएस में कोर्ट उपचार नहीं हो रहा है। उन्होंने इन रोगों से पीड़ित रोगियों को जेएन मेडीकल कालिज में चल रही फीवर ओपीडी में जाने की सलाह दी है।
प्रो. उस्मानी ने कहा कि एमएएस में केवल हृदय रोग, डायबिटीज व अन्य जटिल रोगों आदि से पीड़ित रोगी ही देखे जाएंगे।

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