कट्टरपंथी से आगे निकल कर हुआ चमत्कार

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                 दो टूक और स्पष्टता

कट्टरपंथी ने मुसलमानों के विकास को रोक दिया है। जिसने कट्टरपंथी को दर किनार किया, वह आगे निकल गया। इनमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कर्ण धार सर सैयद अहमद खान भी एक मिसाल है, जिन्हें ऐसे ही कट्टरपंथी लोगों ने इस्लाम से खारिज कर दिया था। आज मौलानाओं को नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सर सैयद अहमद खान का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख गया। वही हाल अब हो रहा है कट्टरपंथी के आगे डॉक्टरों को जान बचानी पड़ रही है। दो टूक और स्पष्ट कहुंगा नेताओं की सर परस्ती से कट्टरपंथी को बढ़ावा मिला है।

सर सैयद अहमद खान ने सबसे पहले मदरसा की स्थापना की। इसकी प्रसिद्धी होने लगी। सर सैयद ने इसके विकास के लिए कॉलेज की स्थापना करने का निर्णय लिया। दर दर झोली फैलाकर नवाब और अन्य लोगों से मिले। सभी धर्म के लोगों की चौखट पर गये। कट्टरपंथी मदरसा के अलावा और कुछ नहीं चाहते थे। उनका विरोध हुआ। कानपुर के मौलानाओं ने उन्हें इस्लाम से खारिज कर दिया। खूब खरी खोटी सुनाई। उन्हें कईं जगह बेज्जत होना पड़ा मगर वे झुके नहीं। बुरा भी नहीं माना।

उन्होंने मुसलमानों के विकास का रास्ता सिर्फ तालीम हासिल करने में समझा और वह अपने मकसद से पीछे हटे नहीं। इस मदरसा को कॉलेज में परिवर्तित करवा दिया। बाद में यह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बदल गया। आज यूनिवर्सिटी में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सर सैयद अहमद खान को याद किया जाता है ना कि उनको इस्लाम से खारिज करने वाले मौलानाओं को। इसलिए आज के दौर में कट्टरता को अलग रखना होगा। पल्स पोलियो की दवा में भी बहुत नाटक हुआ। मौलाना नया हौवा खड़ा करने लगे बच्चों को नपुंसक बनाया जा रहा है। मैने अलीगढ़ में इसकी कवरेज की और खबरों को लिखा। अलीगढ़ में डीएम के राम मोहन राव थे। पता चला डॉक्टरों की टीम लौट आई है और उन्हें घुसने नहीं दिया जा रहा। इसके लिए इमामों को समझना पड़ता था तब वह साथ आकर पोलियो अभियान को सफल बनवाते थे। अब दुनिया में कोरोना वायरस फैल रहा है। डॉक्टर घर जाकर आग्रह कर रहे हैं और उनका स्वागत पथराव से करके अपनी काबलियत का परिचय दे रहे हैं। जबकि कोरोना वायरस को आगे बढ़ने में तबलीगी जमात का मुख्य योगदान रहा। हालांकि काफी संख्या में मुसलमान भी उनकेऐसे कृत्य से दुखी हैं। यह भी साफ साफ कहुंगा जमात में सबसे ज्यादा फोकस कट्टरता पर रहती है। नये दौर से गुजरने की जगह 1500 साल पुरानी पीढ़ी कैसे गुजरी उसकी कहानी सुना दी जाती है। यह नही देखते 1500 साल पहले इतना विकास नहीं था। लोगों में रोग नहीं थे। इसलिए एक दूसरे की थाली में खाते थे। अब घर घर में रोग शुरू हो गए हैं। इसलिए झूठा खाने से रोग पैदा होगा। यही वजह है कोरोना वाइरस प्रचंडरूप धारण कर रहा है। अफसोस भारत में राजनेता वोट धुर्वीकरण की खातिर कट्टरपंथियों के गलत प्रस्ताव के साथ रहे।

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