कालाबाजारी का समय देखते हैं

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जब जब विपत्ती में समय मांगा है तब तब कालाबाजारी फायदा उठाते रहे हैं। नोट बंदी में ब्याजखोर से लेकर नोकरशाही भी पीछे नहीं हटे। अब दुनिया भर में कोरोना वाइरस महामारी में हर कोई परेशान है, इसके बावजूद कालाबाजारी करने वालों की आंखों में पानी नहीं है। कुछ नेता राजनीति करने से कतरा नहीं रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबन्दी की। बैंक से लेकर बड़े बड़े लोग कालाबाजारी कर गये। मौके का फायदा उठाने में संकोच नहीं किया। पांच सौ का नोट के बदले साढ़े चार सौ और चार सौ रुपये दिए। बैंक वालों ने लम्बी लाइन में खड़े लोगों पर तरस  नहीं खाया बल्कि प्राथमिकता उन्हें दी जो नम्बर दो की धनराशि को नम्बर एक में तब्दील कराई। ब्याजखोर भी कम नहीं पड़े। वे भी लोगों को बैंक लाइन में रुकवाने लगे और पांच सौ का नोट साढ़े चार सौ और पांच सौ रुपये में बदला।

अब दुनिया भर में कोरोना वाइरस तेजी से फैलती जा रही है। चीन की गलती का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। चीन की नादानी से अब तक कई हज़ार लोग काल के गाल में समा चुके हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। 321 लोग इस बीमारी में है। चार की मौत हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए मास्क जरूरी है। कालाबाजारी करने वालों ने दस रुपये वाले मास्क कीमत 30 रुपये कर दी है। स्थिति यह है कि अब यह कुछ ही दुकानों पर मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू लगाने की घोषणा कर दी है। इसकी आड़ में अफवाह फैलाई जा रही हैं। इस वजह से लोगों ने आटा, सब्जी और मसाले को जमकर एकत्र कर लिया है। बाजार में इन खाने वाली वस्तुओं का मूल्य भी आसमान छूने लगा है। शनिवार की शाम को पता चला दुकानों से दाल और आटा ही खत्म हो गया। जाहिर है कि अब इस महंगाई की मार गरीबों पर पड़ेगी। दो वक्त की रोटी के लिए मजदूर सुबह जाता है और शाम को घर आता है। उसे इतना धन नहीं मिलता जो दिन के लिए खाघन खरीद ले। जबकि सरकार आश्वस्त कर रही है संयम बनाये रखें। इस महामारी में साथ दें फिर भी दया नहीं आ रही है।

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