किसान के सामने जमाखोर भी कोरोना वायरस जैसे

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कोरोना वायरस के अलावा भारत सरकार के सामने कई और चुुनोती सामने खड़ी है। इस बार किसान भी परेशान हैं। पिछले कई वर्षों से किसान को उसकी उपज नहीं हासिल हुुई। किसान ने हिम्मत नहीं हारी। इस बार सरकार का फर्ज बनता है कि वह किसान का साथ दे। ताकि जमाखोर और किसानों की जमीन को ओने पौने भाव खरीदने वाले भूमाफिया को सबक सिखाया जाए।

किसान कर्ज में डूबा हुआ है। सूदखोर से लेकर पीछले कई साल की चुुनौती है। किसान पर कर्ज ओर का भी है। इस बार कुछ आस पास थी लेकिन कुदरत ने मार डाला । कई दिनों से बरसात हो रही है। ओला वृष्टि से किसान खेत में रो रहे हैं। खेत में फसल नष्ट हो गई है। इससे एक किसान की साल भर की मेहनत और कमाई साफ हो गई है। यह कहा जायअन्नदाता के सामने चुुनौती खड़ी हो गई है तो इसमें कोई संशय नहीं है, ऐसा सरकार का फर्ज बनता है कि अन्नदाता की परेशानी को समझे। ऐसी योजना बनाई गई, जिससे उसकी उपज का पैसा ही निकल आये। मैंने खुद ओला वृष्टि और बरसात में डूबी हुई फसल को देखा है। किसान को इस परेशानी की आड़ में कोई बीमारी दिखाई नहीं दे रही है। बेमौसम बरसात से किसान को रोग भी लग सकता है। इस पर सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए भूूमाफिया और जमाखोर ज़रा भी संकोच नहीं करते। किसानों की जमीन को ओने पोने भाव  खरीदारी कर सकते हैं। यानी अन्न दाता का अन्न छीनने में आज़ादी मानेंगे।  इस तरह के कई भूमाफिया अभी से किसान के पीछे लग गए हैं। .सरकार को इन जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई अभी से शुुरू कर देेंनी चाहिए।  मैने भी ऐसा दौर देखा है। भूमाफिया  जमीन को ताकने लगे थे। जमाखोर ओने पौने भाव लगाने लगे। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। सभी चारो खाने धड़ाम हो गए। 

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