गुरुवार का दिन बना काल, 11 मरे

0
341

देश के लिए गुरुवार का दिन काला साबित हुआ। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार (7 मई) तड़के एक रासायनिक संयंत्र से गैस का रिसाव हो गया। नतीज  बच्चे समेत 11 लोगों की मौत हो गई और करीब 200  से अधिक बीमार हुए । सैकड़ों लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। इस इलाके के लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, जी मचलाना और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने की शिकायत की। टीवी चैनलों पर प्रसारित फुटेजो में लोग सड़कों पर बेहोश पड़े दिख रहे हैं। रिपोर्टों में बताया गया है कि गैस रिसाव को काबू कर लिया गया है।

एनडीआरएफ के महानिदेशक एसएन प्रधान ने प्रेस वार्ता में बताया कि अभी तक गैस लीक की वजह से 11 लोगों की जान जा चुकी है। एनडीआरएफ के सदस्य कमल किशोर शर्मा ने कहा कि फैक्टरी के नजदीकी इलाकों में रहने वाले करीब एक हजार लोग लीक हुई गैस के संपर्क में आए हैं। प्रधान ने कहा घटना स्थल के तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 500  लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

याद आई 36 साल पुरानी बात

36 साल पहले 2 दिसंबर 1984 की रात मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित कीटनाशक बनाने वाली यूनियन कार्बाइड प्लांट से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ जिसकी वजह से कुछ ही घंटों के भीतर हजारों लोग मारे गए थे।

भोपाल गैस त्रासदी में हजारों बेगुनाह दम घुटने और हार्ट अटैक से मारे गये। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 3787 लोगों को इस दर्दनाक त्रासदी में जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा आज भी कई लोगों को सांस की बीमारी, अंधेपन और कैंसर की समस्या सामने आ रही है। भोपाल गैस त्रासदी के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। भोपाल गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए काम करने वाले भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) ने दावा किया कि प्रदेश की राजधानी में कोरोना वायरस से हुई कुल 17 मौतों में से 15 लोग गैस पीड़ित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here