झूठे दुष्कर्म के आरोप में 19 साल बाद घर आया विष्णू

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झूठे दुष्कर्म के एक केस ने विष्णु तिवारी और उसके परिवार को तहस नहस कर दिया। ललितपुर के विष्णु तिवारी को 19 साल तीन माह बाद आखिरकार आगरा सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उन्होंने यह सजा उस झूठे दुष्कर्म केस के लिए काटी जो उन्होंने किया ही नहीं था। हाईकोर्ट ने एक माह पहले उन्होंने निर्दोष करार दिया था। लेकिन इस गुजरे दिन में उनसे नियती ने उनके माता-पिता और दो भाई छीन लिए। उनका आखिरी बार चेहरा भी देखना विष्णु को नसीब नहीं हुआ।

विष्णु जब जेल से बाहर आए तो उनके चेहरे पर सुकून था। वे उस सिस्टम का भी कृतज्ञ थे जिसने उन्हें बेगुनाह साबित किया, लेकिन जब उनके मन में बीते 19 साल की तस्वीर सामने आती तो चेहरे पर एक छटपटाहट के बादल उमड़ने लग रहे थे। जेल से बाहर निकलते वक्त विष्णु ने अपने हाथ जोड़ रखे थे। उन्होंने बताया, “मुझे दुनिया बदली-बदली सी लग रही है, हमारा सरकार से एक ही अनुरोध है कि हमारे लिए कुछ किया जाए। हमारी जमीन भी इस केस में बिक गई।”

लोवर कोर्ट से हुई थी आजीवन कारावास की सजा

दरअसल, ललितपुर जनपद के महरौली थाना क्षेत्र के सिलवान गांव निवासी विष्णु तिवारी साल 2000 से जेल में बंद थे। उन्हें लोवर कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा हुई थी। साल 2003 में उन्हें आगरा सेंट्रल जेल लाया गया था। उनके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। इसलिए जेल की ओर से अपील करने पर विधिक सेवा प्राधिकरण ने उनके मामले की पैरवी हाईकोर्ट में की। एक माह पहले विष्णु तिवारी को हाईकोर्ट ने निर्दोष करार दिया।

ढाबा खोलने की तैयारी में विष्णु

विष्णु तिवारी ने बताया कि गांव में पड़ोसियों से उनकी पेशबंदी चल रही थी। इसी में पड़ोसियों ने उनके खिलाफ SC/ST एक्ट और दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज करवा दिया था। बताया कि वह बनारसी साड़ियों का कारीगर था। लेकिन जेल में रसोईया का काम किया है। कपड़ा बुनने का काम भी सीखा है। अब एक ढाबा खोलूंगा। विष्णु ने जेल में 600 रुपए कमाए थे। इन्हीं रुपयों को लेकर वे अपने घर जाने के लिए जेल के बाहर खड़े थे।

तीन साल बाद मां की मौत के बारे में पता चला
विष्णु ने कहा कि 19 साल में सबकुछ उजड़ चुका है। साल 2014 में पिता की मौत हो गई थी। एक साल बाद मां ने भी बीमारी से दम तोड़ दिया था। इसके बाद बड़े भाइयों राम किशोर और दिनेश की भी मौत हो गई। पिता की मौत के बारे में गांव के परिचित ने पत्र भेजकर बताया था। लेकिन मां व दो भाइयों की मौत का पता तीन साल बाद चला था। साल 2018 में छोटा भाई महादेव जेल में मिलने आया तो उसी ने बताया था कि अब मां नहीं रही।
आदेश मिलने के बाद किया गया रिहा

आगरा सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीके सिंह ने कहा कि विष्णु को 19 साल से ज्यादा समय जेल में हो गया। इनकी अपील उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लंबित थी। न्यायालय ने इन्हें निर्दोष घोषित किया। जिसके बाद हमें आदेश प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

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