दिल्ली हिंसा में पुलिस की विफलता

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सीएए के विरोध में हुई हिंसा रोकने में पुलिस विफल रही, इसमें कोई गलत नहीं है। राजधानी में हिंसा होती रही और खाकी वर्दी देखती रही। दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल और एक आईबी अफसर की मौत हो गई। उपद्रवी पहले से गोली और हथियारों को एकत्र करते रहे और पुलिस कोई जांच नहीं कर पाई।

उपद्रव उस दिन हुआ जब अमेरिका के राष्ट्रपति भारत यात्रा पर आए थे। कोई हल्का विवाद शुरू होता है उसके लिए संबंधितित मंत्री को घेर लिया जाता है। दिल्ली केंद्र शासित राज्य है। इसकी पूरी जिम्मेदारी गृह मंत्री की होती है। गृह मंत्री का दायित्व बनता था कि वह आंदोलन कारियो को आंदोलन के शुरू में वार्ता के लिए बुलाते और उन्हें सीएए की जानकारी देते। शुरू में इस कदम को उठाया जाता है तो शायद पचास लोगों की जान नहीं जाती। पुलिस के सामने उपद्रव होता रहा और कोई एक्शन नहीं लिया गया। देश के सिस्टम और ख़ामियों को सुधारने के लिए राजनीति को दूर रखा जाए। 

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