पत्रकार सजग रहें, जान है तो जहान

0
255

दो दूक और स्पष्ट

कोई दौर था जब पत्रकार सुबह जाते थे और देर शाम 8 बजे तक घर आ जाते थे। उस दौर में तनख्वाह कम मिलती थी। आज वेतन बढ़ा है लेकिन खर्चा पहले से अधिक हो गए हैं। आज के दौर में कई चुनोतियाँ भी है। पहले अखबार का मालिक पत्रकार को परिवार का सदस्य मानता था, अब नोकर ही मानता है। इसलिए कोरोना वायरस की चपेट से सभी पत्रकारों को बचकर रहना है। मुख्यालय पर बैठने वाले खबरों के लिए नया मोड़ वाली खबरों के लिए निर्देश देंगे लेकिन दोस्तो बचकर रहना परिवार की जिम्मेदारी आपको खुद निभानी है। बुरे वक्त में कोई साथ नहीं देता है यह मेरा अनुभव है।

कोरोना वायरस हर रोज पैर पसार रहा है। इइस बीमारी का अभी कोई खास दवा सामने नहीं आई है। लोगों तक खबर पहुंचाने के लिए पत्रकार जुटे हुए हैं। वह सुबह जाते हैं और देर रात करीब 12 बजे के बाद ही घर पहुंचते हैं। देर रात घर जाकर खाना खाते हैं। दो टूक और स्पष्ट कहुंगा इस बीमारी का कोई अता पता नहीं है। इसलिए पहले परिवार को भी देखो। अखबार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मालिक खरबों रुपये कमा चुके हैं, इनके आने वाली पीढ़ी भी धनराशि को खर्च भी नहीं कर पायेगी। आज के दौर में पत्रकारों के पास बच्चों की शिक्षा एक प्रकार की चुनोती बन जाती है। पहले पत्ररकारिता सरल थी अब खबरों को लेकर प्रतियोगिता में तब्दील हो गई है।

मैने हर दौर को देखा है। कितना भी अच्छा काम करो लेकिन मीडिया मालिक को इससे कोई लेना देना नहीं होता। वह सिर्फ सम्पादक की रिपोर्ट पर सम्पादक जैसे आसीन पदों पर सुशोभित कर देता है। जिसने मेहनत की और लाखों रुपये कम्पनी को राजस्व के दिये। उन गुन अहसास को यह मालिक भूल जाता है। मेरे सामने कई ऐसे वाकया हुए है रिपोर्टिंग के दौरान रिपोर्टर की मौत हो जाती है लेकिन बाद में उसके परिवार की कोई सुध नहीं लेता है। यानी आंखों का पानी सूख गया। अब कोरोना वायरस दुुनिया में पैर पसार चुका है। इसलिए इससे बचाव जरूरी है। पता चला है कई पत्रकार इसबीमारी की चपेट में आ गए हैं। इसलिए सचेत रहिये।

जान है तो जहान है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here