पारदर्शिता में अलख जगाते रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह

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पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि संबंधो को निभाने में भी अग्रणी रहे हैं। उस समय विधायक चुनाव जीता जब पार्टी का कोई वजूद नही होता था। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद विभागों में पारदर्शिता भर्ती करके एक अनुकरणीय मिसाल कायम की। वैसे दो बार भाजपा से बगावत की लेकिन राम मंदिर मुद्दे के अलावा अपने सिद्धांतों से कभी पीछे नहीं हटे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वर्गीय कल्याण सिंह के निधन पर दुख जताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह एक जमीन से जुड़े नेता रहे हैं। जो एक नेता में खूबी होनी होनी चाहिए वह उनमें भरी रही। पूर्व में भाजपा का नाम जनसंघ था। पार्टी का कोई वजूद नही था। इसके बाद भी कल्याण सिंह विधानसभा में पहुंचते रहे। पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को संभाला। शातिरों को जेल की सलाखों में पहुंचाया। सबसे खास बात रही कई सालों से राम मंदिर निर्माण के आड़े आ रही बाबरी मस्जिद विध्वंस की भूमिका के मुख्य हीरो रहे। उस समय  केंद्र की कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री ने अयोध्या में कार सेवकों गोली चलवाने को कहा। लेकिन कल्याण सिंह ने स्पष्ट मना कर दिया। दो बार पार्टी से बगावत की। फिर भी राम मंदिर पर अपनी राय कभी नहीं बदली। खुद विवादित ढांचा गिराने की जिम्मेदारी संभाली।

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी में पारदर्शिता दिखाई। एक रिकॉर्ड बनाया और गड़बड़ी नही करने दी। पार्टी से बगावत करने पर यह भी दिखाया कि पिछड़ा वर्ग में एक पकड़ है।

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर शोक

लेखक राजीव कुमार शर्मा

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