पिता की अंत्येष्टि से पहले संविधान की मर्यादा मानते योगी

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दो टूक और स्पष्टता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता की मृत्यू की खबर आते ही उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में सनसनी मच गई। कईं दिनों से खबर देखता था लॉक डाउन में बेटा अपने पिता की अंत्येष्टि में शामिल नही हुआ। कोई कही फंस गया। सरकार कोई मदद नहीं कर रही। सोमवार सुबह पता चला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता का निधन हो गया। मुख्यमंत्री ने पहले लॉक डाउन की सीमा और प्रदेश के करीब 22 करोड़ लोगों की जिंदगी की देख भाल को चुनकर एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है।

लॉक डाउन में देश और दुनिया की स्थिति से हर कोई परिचित है। मन्दिर और मस्जिदों बंद है। घर में पूजा अर्चना हो रही है। घरों में ही नमाज अदा की जा रही है। उत्तर प्रदेश की सख्ती देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर बताई जा रही है। प्रदेश में 22 करोड़ आबादी के बाद भी कोरोना वाइरस के फैलने पर काफी अंकुश है। कई जिलों में एक भी कोरोना वाइरस मरीज नहीं है। फिर भी संख्या एक हजार के पार पहुंच गई है। लोगों को तकलीफ हो रही है। इसके बावजूद सुविधाएं भी अच्छी मुहैया कराई जा रही हैं। रविवार को पता चला कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता की तबियत खराब है। कईं अफवाह फैलाई गई। सुबह खबर पता हुई योगी जी के पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। एक खबर यह भी पता चली योगी जी की मौसी को लॉक डाउन में उत्तर प्रदेश की सीमा के बाहर यानी जहां दाह संस्कार था वहाँ जाने नहीं दिया गया और वह वापस लौट आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों को इस संकट की घड़ी में अंत्येष्टि में भीड़ ना करने का आग्रह करके लॉक डाउन को प्राथमिकता देकर सिद्ध कर दिया कि देश का कानून पहली प्राथमिकता है। वह खुद अंत्येष्टि में नहीं गए। लॉक डाउन पर अधिकारियों के साथ बैठक करके प्रदेश की 22 करोड़ जनता के दुख दर्द में शामिल हुए। अगर वह अपने पिता की अंत्येष्टि में शामिल होते तो विरोधी उन पर सवाल उठाते। कुल मिलाकर यही कहा जायेगा मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण के दौरान ईश्वर की कसम में संविधान की आस्था का पूरा मान सम्मान रखा है। परिवार प्रदेश की जनता को माना है। अपने परिवार को जनता की तरह ही रखा है।

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