ब्राह्मण जिस पार्टी से नाराज़ हुए वह सत्ता में नहीं आई

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राजीव शर्मा। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण की नाराज़गीहर पार्टी को भारी पड़ी है। ब्राह्मण वोट ने सत्ता बनवाई है और कुर्सी से बेदखल भी कर दिया है। वर्ष 1989 के विधानसभा चुनाव में नारायण दत्त तिवारी को भी सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया गया। फिर बसपा सुप्रीमो मायावती और अखिलेश यादव को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाकर अब भाजपा को आसीन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका है। अब फेसबुक पर उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चल रही राजनीति वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है।

आजादी के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में ब्राह्मण वोट बैंक हावी रहा है। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक ब्राह्मण वोट बैंक है। कांग्रेस के शासन काल में इसी जाती के अधिकतर मुख्यमंत्री बने। सबसे अधिक मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी आसीन हुए। 1989 में इसी वोट बैंक ने जनता दल और भाजपा गठबंधन को आसीन कराया। फिर वर्ष1991 के विधानसभा चुनाव में रामलहर हावी हुई। फिर यह वोट बैंक भाजपा के साथ गया और कल्याण सिंह को आसीन कराया। इसके बाद एक बार बसपा सुप्रीमो मायावती को पूर्ण बहुमत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही और वह पांच साल आसीन रही। बसपा से यह वोट बैंक नाराज़ हुआ और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने में इस वोट का महत्वपूर्ण स्थान रहा। सपा सरकार में दंगे हुए। यह वोट खिसक गया और हिंदुत्व लहर में शामिल हो गया। नतीजा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रचंडबहुमत से आज आसीन है। अब उत्तर प्रदेश में फेसबुक और मीडिया पर कई वारदातें प्रकाश में आई है। इसमें ब्राह्मण की हत्या पर प्रदेश की योगी सरकार को घेरा जा रहा है। इस वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जुट गई है। भाजपा हिंदुत्व कार्ड को अपना रही है। अब 2022 के विधानसभा चुनाव में देखना है यह वोट बैंक किस पाले में है।

 

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