मर्यादा लांध गया पक्ष और विपक्ष

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पदभार ग्रहण करने से पहले ईश्वर की शपथ दिलाई जाती है कि बिना किसी भेदभाव के संविधान की मर्यादा में रहकर ईमानदारी से करना होगा। फिर ईश्वर से किया वायदा भूल जाते हैं और संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति शुरू हो जाती है। जैसा कि अब भी सीएए पर चल रहा है। इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष सभी दलों के नेताओं ने जनता को आगे करके राजनीतिक रोटी सेकी है। संसद में कानून पास होने के बाद कांग्रेस से सोनिया गांधी ने घर से निकल कर सड़क पर आंदोलन करने का डंका बजाया। फिर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी आग में घी डालने का काम किया। भाजपा भी कम नहीं। इत्तेफाक दिल्ली विधानसभा चुनाव आ गए और भाजपा नेता अनर्गल बयान बाजी करने लगे। भाजपा की रैली में वोट ध्रुवीकरण के लिए नारेबाजी में गाली गलौज का शब्द प्रयोग हुआ। जैसे देश के गद्दारों में गोली मारना में।मतदान के आखिरी दिन तक कानून व्यवस्था ताक पर रख दी और गाली गलौजभी जमकर की गई। पार्टी के शीर्ष नेताओं की खामोशी से कई सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने पर विपक्ष को भी प्रदर्शन की आग में घी डालने का मौका मिल गया। बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है इसका नतीजा 35 से अधिक लोगों की मौत का मिला है। इसमें पुलिस के लोगों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। अगर सत्ता में आसीन नेतृत्व वाले को गलत बयान बाजी और नारेबाजी पर दोनों ओर से कार्रवाई होती है तो शायद हिंसा और आगज़नी पर काबू पाया जा सकता था। मेरा मकसद संसद से पास किसी कानून पर आपत्ति दर्ज करना नहीं है। लेकिन ऐसे बोल और नारेबाजी नहीं होनी चाहिए, जिससे अन्य किसी को ठेस पहुँचे। दिल्ली में हुई हिंसा ने विदेशी में गलत संदेशभेजा, जो निंदनीय है।

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