मीडिया में बहाना मिल जायेगा छटनी का

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लेबर कानून में संशोधन पहले से काम कर रहे मजदूरों के सामने बहुत बड़ी चुनौती साबित होगी। संशोधन में इस समय मुनाफे कम्पनियों को अलग रखा जाए। खासकर मीडिया कर्मचारियों के लिए पहले जैसा लेबर एक्ट रखा जाए। मीडिया कोई घाटे में नहीं है। बस फर्क इतना है मीडिया मालिक यहां से कमाने वाले धन अन्य नई यूनिट और अलग से चल रहे व्यापार में थोप देते हैं।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर में चल रहे लॉकडाउन से भारत समेत विश्वभर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉक डाउन पर कहा था किसी का वेतन नहीं काटा जाए। फिर भी वेतन काटा गया। अच्छा है विदेशी कंपनियों को भारत में बुलाया जाए। उन कम्पनी के लिए जो उचित कानून बने बनाओ। लोगों को रोजगार मिलेगा। फख्र से कहुंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में एक नई मिसाल है। किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलेगा। जमीन अधिग्रहण का विरोध भी किसान नहीं करेंगे। हां जमीन अधिग्रहण पर कुछ राजनीति गरमायेगी। स्वतः जमीन मिलते ही विरोधी शांत हो जाएंगे। इतना अवश्य ध्यान रखने की जरूरत होगी जो कम्पनी फायदे में हो उस पर पुराना लेबर एक्ट यथावत लागू रहे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लेबर के खून पसीने से ऊंचाई पर पहुंचा मीडिया मालिक 20 से 30 हज़ार रुपये प्रति माह मिलने वाले की छटनी करेगा। इसके स्थान पर 8 से 15 हजार रुपये माह वाले की भर्ती होगी। 20 से 30 हजार मिलने वाला बेरोजगार हो जाएगा। उम्र अधिक होने के कारण उसे अन्य कोई संस्था रोजगार नहीं देगी। मीडिया मालिक के चाटुकार भी इसका फायदा उठाने में हिचकिचाहट नहीं करेंगे। इस तरह के कईं उदाहरण हैं।

बहुत अच्छा है चीन से हटकर कम्पनी भारत में आयें। लोगों को रोजगार मिलेगा। अर्थव्यवस्था ठीक रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों से कहा था कि भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह चीन से पलायन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी तरफ आकर्षित करे। प्रधानमंत्री के इस आव्हान के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात ने अपने लेबर कानूनों में बड़े बदलावों की घोषणा कर दी है।

तीनों राज्यों ने तीन वर्ष के लिए उद्योगों को न केवल लेबर कानून से छूट दी है, बल्कि उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन व सरल कर दिया है। नए उद्योगों को अभी लेबर कानून की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकरण कराने और लाइसेंस प्राप्त करने में 30 दिन का वक्त लगता था, अब वह प्रक्रिया 1 दिन में पूरी होगी।  इससे कर्मचारियों पर काम का दबाव और बढ़ेगा।

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