वृंदावन की परिक्रमा करते हुए ब्रजभूमि को प्रणाम किया, अंतिम दिन तीर्थनगरी में आस्था का जनसैलाब उमड़ा

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जय श्री कृष्ण, जय श्री राधे। इस तरह की गूंज के साथ संत, महन्तों ने रंग भरनी एकादशी पर ब्रज में यमुना के तट पर कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक में डेरा जमाए संत-महंतों ने रंगभरनी एकादशी पर गुरुवार को वृंदावन की परिक्रमा करते हुए ब्रजभूमि को प्रणाम किया। अंतिम दिन तीर्थनगरी में आस्था का जनसैलाब उमड़ा। संतों ने हरिद्वार कुंभ के लिए जाने से पहले श्रीबांकेबिहारी और यमुना जी का आशीर्वाद लिया। वृंदावनवासियों ने भी संतों पर फूल और गुलाल की बरसात कर विदाई दी। पंचकोसीय परिक्रमा में श्रद्धा भक्ति का अद्भुत नजारा देख आमजन भी भाव-विभोर हो गए।


वृंदावन में यमुना के तट पर वसंत पंचमी से शुरू हुए वैष्णव कुंभ रंगभरनी एकादशी की परिक्रमा के साथ पूर्ण हो गया। तीनों अनी अखाड़ों के श्री महंतों की अगुवाई में वृंदावन कुंभ में कल्पवास कर रहे हजारों संत, महंतों ने भक्तों के संग कान्हा के धाम की पंचकोसीय परिक्रमा की।


गाजे-बाजे की ध्वनी के साथ सुबह 8 बजे तीनों अनी में निर्मोही के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज, दिगंबर के श्रीमहंत कृष्णदास, निर्वाणी के श्रीमहंत धर्मदास महाराज की अगुवाई में संत-महंतों, धर्माचार्यो की टोलियां कान्हा के लीला धाम की परिक्रमा के लिए कुंभ मेला क्षेत्र से निकलीं।
छत्र चंवर लगाए संत-महंतों के काफिले और ढोल मृदंग की धुन पर नृत्य करते श्रद्धालुओं की टोली श्रद्धा भक्ति का अद्भुत नजारा प्रस्तुत कर रही थीं। संतों की टोलियों का भक्तों ने फूल और गुलाल से भव्य स्वागत किया। इससे संत भी अभिभूत हो गए। इस मौके पर श्रीमहंत राजेंद्र दास ने कहा कि अब देवभूमि हरिद्वार कुंभ में पहुंचेंगे।

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