शिक्षक भर्ती में रोक पर योगी सरकार जिम्मेदार: रामजीलाल सुमन

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#प्रदेश_सरकार_की_विवादास्पद_कार्यप्रणाली_के_कारण_शिक्षक_भर्ती_प्रभावित
69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती पर उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश दिया जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं है योगी सरकार में जिस प्रकार सहायक अध्यापक भर्ती की जा रही है वह प्रारंभ से ही शंकाओं के घेरे में है वास्तविकता यह है की 137000 शिक्षकों के पद शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर किए गए समायोजन को रद्द होने के बाद रिक्त हुए थे।

यह बातें सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन ने कही। उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को दो अवसर देते हुए सहायक अध्यापक पद पर शिक्षा मित्रों को नियुक्ति में 25 अंक का भारक देते हुए वरीयता प्रदान करने का आदेश पारित किया था परंतु उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा शुरू से ही शिक्षक भर्ती को लेकर कानूनी अड़चनें पैदा करने की रही है पहले चरण में 68500 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित किया गया इस भर्ती में उत्तर प्रदेश सरकार ने योग्यता के नाम पर अतरिक्त लिखित परीक्षा का आयोजन किया जो कि संपूर्ण रूप से विवादों के घेरे में रही माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उपरोक्त लिखित परीक्षा के संबंध में सीबीआई जांच कराए जाने का निर्णय पारित किया तदोपरांत यह भर्ती उच्च न्यायालय के आदेश के आधीन पूर्ण की गई। 69000 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन शुरू से ही त्रुटिपूर्ण था विज्ञापन में पासिंग मार्क्स के संबंध में किसी प्रकार के कट ऑफ की जानकारी पूर्व में प्रकाशित नहीं की गई थी शिक्षक भर्ती परीक्षा पूर्ण होने के पश्चात पासिंग मार्क्स में कट ऑफ 60-65 किया गया जबकि 68500 में कट ऑफ 40-45 निर्धारित था इस कटऑफ के संबंध में कई अभ्यर्थियों ने माननीय उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की लंबे समय तक उपरोक्त वाद माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन रहा एकल बेंच द्वारा 40- 45 कट ऑफ भर्ती किए जाने का निर्णय पारित किया क्योंकि सरकार की मंशा भर्ती को और अधिक उलझाने की थी अतः सरकार द्वारा एकल बेंच के निर्णय के विरुद्ध डबल बेंच में अपील की गई लंबे समय विचाराधीन निर्णय के पश्चात 60-65 पर डबल बेंच ने सरकार के पक्ष में निर्णय पारित किया।
जिस पर भर्ती वर्तमान में गतिमान थी सुप्रीम कोर्ट में इसके विरुद्ध याचिकाएं दायर की गई माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा टेट पास शिक्षामित्रों का डाटा तलब करते हुए उनके पदों को सुरक्षित रख अन्य पदों पर भर्ती किए जाने के आदेश पारित किए। परंतु राज्य सरकार संपूर्ण पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूर्ण करने का प्रयास कर रही थी इसी बीच राज्य स्तरीय कराई गई परीक्षा में विवादास्पद प्रश्नों के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश पारित करते हुए संपूर्ण भर्ती पर उन्हें रोक लगा दी है।
संपूर्ण घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार शिक्षामित्रों के अधिकारों का हनन करते हुए भर्ती करने का प्रयास कर रही है तथा तमाम कानूनी अड़चनों के साथ सरकार का उद्देश्य भर्ती को उलझाना है ना की बेरोजगारों को रोजगार प्रदान करना एक और सरकार शिक्षा की गुणवत्ता की बात करती है दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण निरंतर नौनिहालों की शिक्षा सरकार की विवादास्पद कार्यप्रणाली के चलते प्रभावित हो रही है जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।

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