संकट की घड़ी से निपटने को जगत मां का आशीर्वाद जरूरी

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राजीव शर्मा।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की जनता से बुधवार को रूबरू हुए। वीडियो कांफ्रेंसिंग से कहा  नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री का है। मां शैलपुत्री स्नेह, करुणा और ममता का स्वरूप हैं। उन्हें प्रकृति की देवी भी कहा जाता है। देश जिस संकट से गुजर रहा है, ऐसे समय में उनके आशीर्वाद की बहुत आवश्यकता है। मैं कामना करता हूं कि उनकी कृपा से इस संकट से हम उनके आशीर्वाद से लड़ाई लड़ लेंगे। उन्होंने महाभारत का ज़िक्र किया कहा महाभारत का युद्ध 18 दिन में जीता गया था। कोरोना को पूरा देश 21 दिन में हरा देगा। महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण सारथी थे। आज देश की 130 करोड़ जनता सारथी हैं।

काशी की जनता करेगी मार्ग दर्शन

मोदी ने इस संकट की घड़ी में काशी वासियों का सहयोग मांगा कहा संकट की इस घड़ी में काशी सबका मार्गदर्शन कर सकती है। काशी यानी  शिव। इस संकट के समय में काशी के लोग पूरी दुनिया को सीख दे सकते हैं।  शिव की नगरी में, महाकाल-महादेव की नगरी में संकट से जुझने का, सबको मार्ग दिखाने का सामर्थय है।  काशी का अनुभव शाश्वत, सनातन, समयातीत है और इसलिएआज लॉकडाउन की परिस्थिति में  काशी देश को संयम, समन्वय, संवेदनशीलतासिखा सकती है। काशी देश को सहयोग, शांति, सहनशीलता सिखा सकती है। काशी देश को साधना, सेवा, समाधान सिखा सकती है।

सफेद कपड़े वाले ईश्वर का रूप
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा अस्पतालों में  इस समय सफेद कपड़ों में दिख रहा हर व्यक्ति ईश्वर का ही रूप है। आज यही हमें मृत्यु से बचा रहे हैं, अपने जीवन को खतरों में डालकर ये लोग हमारा जीवन बचा रहे हैं। ये डॉक्टर और कर्मचारी हमें बचा रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस न हमारी संस्कृति को मिटा सकता है और न ही हमारे संस्कार मिटा सकता है। इसलिए संकट के समय हमारी संवेदनाएं और जागृत हो जाती हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर मैं कहूं कि सब कुछ ठीक है, सब कुछ सही है, तो मैं मानता हूं कि ये खुद को भी धोखा देने वाली बात होगी। इस समय केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, जितना ज्यादा हो सके, जितना अच्छा हो सके, इसके लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। ऐसे में जब देश के सामने इतना बड़ा संकट हो, पूरे विश्व के सामने इतनी बड़ी चुनौती हो, तब मुश्किलें नहीं आएंगी, सब कुछ अच्छा होगा, ये कहना अपने साथ धोखा करने जैसा होगा।
 तकलीफें आज हम उठा रहे हैं, जो मुश्किल आज हो रही है, उसकी उम्र फिलहाल 21 दिन ही है। कोरोना का संकट समाप्त नहीं हुआ, इसका फैलना नहीं रुका तो कितना ज्यादा नुकसान हो सकता है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। निराशा फैलाने के हजारों कारण हो सकते हैं, लेकिन जीवन तो आशा और विश्वास से ही चलता है। नागरिक के नाते कानून और प्रशासन को जितना ज्यादा सहयोग करेंगे, उतने ही बेहतर नतीजे निकलेंगे। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि प्रशासन पर कम से कम दबाव डालें, प्रशासन का सहयोग करें। अस्पताल में काम करने वाले, पुलिसकर्मी, सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले, हमारे मीडियाकर्मी इन सभी का हमें हौसला बढ़ाना चाहिए।

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