सबसे बड़ा धर्म मजदूर का दर्द समझना

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दो टूक और स्पष्ट

अधिकतर लोगों ने फेसबुक और सोशल मीडिया पर मजदूर का दुख लॉक डाउन में कई दिनों तक देखा। फिर भी सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। बड़े शहरों में मजदूर पेट भरने के लिए भीख मांगने लगे। कहीं मजदूरों ने जोर शोर से आवाज़ उठाई।  नतीजा पुलिस की लाठियां खानी पड़ी और मुकदमा दायर कर दिया गया। मौत की जानकारी रोज मिल रही थी। औरेया के पास 24 मजदूरों की ट्रक और मेटाडोर भिड़ंत में गई जान ने सरकार की एक साथ नोटबन्दी और लॉक डाउन की खामियां उजागर हुई हैं।

कोरोना वाइरस से लड़ने के लिए सभी दल और देश एकजुट है। दुनिया को पता कोरोना वाइरस फैलाने में चीन ने अमानवीय कृत्य किया। रोगियों की संख्या से लेकर मरने वालों की संख्या को छुपाया। दुनिया में फैलते ही हड़कंप मच गया। अमेरिका, फ्रांस, रूस जैसे विकसित देश भी घुटने टेक गये। देश में लॉक डाउन कर दिया गया। नतीजा लोग बेरोजगार हो गए। अब लोगों ने देखा दो वक्त की रोटी के लिए मजदूर कहां और कितनी दूर जाते हैं। मजदूरों की हालत सोशल मीडिया पर रूह कंपा रही है। शुरू में बस में देरी हुई। भूख से व्याकुलों ने महाराष्ट्र में लॉक डाउन तोड़ा। नतीजा उन्हें पुलिस के डंडे खाने पड़े। कुछ दिन पहले पैदल आये और रेल पटरी पर सो गए और काल के गाल में समा गए। कुछ ऐसे फोटो मिले जो रेल पटरियों पर सो कर थकान मिटा रहे हैं। अब औरेया की घटना रुला गई है। 24 मजदूरों की मौत से सिद्ध हुआ है नया भारत का सपना एक साथ लिये गये निर्णय से साकार नहीं होगा। लॉक डाउन से पहले एक सप्ताह का समय दिया जाता। उनके घर पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था कराना अनिवार्य था। तारीफ उनकी भी होगी जिहोंने रास्ता चल रहे मजदूर के दुख को दूर करने का प्रयास किया।

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