सरकार की प्राइवेट लिमिटेड नीति खतरनाक

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युवा बेरोजगार रहें। जिनका रोजगार चल रहा है वह भी छूट जाये। सरकारी मशीनरी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हवाले करके गुलाम तंत्र बनेगा। सुना था अंग्रेज आये और लोगों को गुलाम बनाया। केंद्र सरकार की इस प्राइवेट लिमिटेड नीति की हठधर्मिता के आगे गुलामी का सीन लाखों युवाओं को देखना होगा।

केंद्र की मोदी सरकार एक सरकारी कम्पनी नहीं बल्कि कई प्राइवेट लिमिटेड के हवाले करने जा रही है। विनिवेश नीति में 23 कम्पनियों को शामिल करके स्वतंत्रता छीनी जा रही है। इसमें एलआईसी का प्राइवेट सेक्टर में पचास प्रतिशत हिस्सा दिया जा रहा है। अभी तक 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत सरकार की थी। यह फायदे में है, इसके बाद लाखों कर्मचारियों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का नोकर बनाने का प्रयास है। सरकार के इस निर्णय से कर्मचारी और युवाओं में गुस्सा है। विनिवेश नीति की 23 कम्पनियों में वह भी शामिल हैं, जिसमें सरकार अपना पूरा हाथ खींचेगी और 100 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट लिमिटेड सेक्टर की होगी। यह कर्मचारियों और आने वाली पीढ़ी के लिए जबरदस्त घातक साबित होगी। भारत सरकार पेट्रोल पंप वाली बीपीसीसी, कुछ सरकारी बैंक भी शामिल हैं। इससे रोजगार कम होगा। कम्पनी कम पैसों और कम मजदूरों पर अधिक काम करायेगी। प्राइवेट सेक्टर का उदाहरण मीडिया है। मीडिया नम्बर वन कहलाने वाली जमकर छटनी कर रही है और की गई है। अलीगढ़ समेत कई जिलों में एक मिडिया ने सैकड़ों कर्मचारियों की नोकरी ली है। वह कर्मचारी रो रोकर अपने घर गये हैं। अब घर बैठकर नोकरी की तलाश में जुटे हुए हैं। मीडिया का हाल मैने अपनी आंखों से देखा है। मै खुद पीड़ित रहा हूं। इसी प्रकार कई सरकारी बैंकों के निजीकरण का प्रयास चल रहा है, जो बेरोजगारी की समस्या पैदा होगी।

लेखक राजीव शर्मा ग्रेट न्यूज मॉल के प्रधान सम्पादक है। कई समाचार पत्रों में रिपोर्टर रहे हैं।

 

 

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