हाथरस की गुड़िया के चार आरोपियों को सीबीआई ने माना आरोपी

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हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र के बूलगढ़ी गांव में दलित युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मृत्यु के लिये चारों आरोपियों को आरोपी माना है। चंदपा थाना क्षेत्र के गांव बूलगढ़ी के बेहद चर्चित कांड में सीबीआइ ने शुक्रवार को आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया।

सीबीआइ की टीम की ओर से जांच अधिकारी सीमा पाहूजा ने चार्जशीट दाखिल की। केस में पीड़िता के भाई की ओर से ही एफआइआर दर्ज कराई गई थी। हाथरस मामले में दाखिल चार्जशीट में चारों आरोपितों के खिलाफ सीबीआइ ने सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, छेड़छाड़ और एससी-एसटी की धारा में केस बनाया है। अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि चारों आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

मामले में सीबीआइ संदीप, लवकुश, रवि व रामू के खिलाफ दो महीने से जांच कर रही थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने सीबीआइ को जांच के लिए केस सौंपा था। सीबीआइ ने हाथरस में सक्षम न्यायालय में संदीप, लवकुश, रवि व रामू के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। सीबीआइ ने 11 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार के अनुरोध पर और भारत सरकार से आगे की अधिसूचना पर मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने 22 सितंबर को पीड़िता के आखिरी बयान को आधार बनाया है। सीबीआई की टीम ने अब निर्णय कोर्ट पर छोड़ दिया है।
हाथरस में सीबीआइ के कैम्प कार्यालय पर ताला लगा था। टीम के सदस्य गाजियाबाद से सीधा हाथरस पहुंचे। सीबीआइ ने दो दिन पहले हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई के दौरान 18 दिसंबर को चार्जशीट दाखिल करने की बात कही थी।

इस मामले की जांच कर रही सीबीआइ पीड़िता के भाई को फोरेंसिक साइकोलॉजिकल टेस्ट के लिए गुजरात के गांधीनगर लेकर जाएगी। यहां उसका साइकोलॉजिकल एक्सेसमेंट कराया जाएगा। हाथरस कांड में पीड़िता के भाई की ओर से ही एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
बूलगढ़ी कांड के चारों आरोपितों के गांधीनगर में पॉलीग्राफ टेस्ट हो चुका है। इसके साथ ही जांच एजेंसी ने बूलगढ़ी गांव में सीन रीक्रिएशन करने के साथ ही यहां पर हर स्तर की पड़ताल कर चुकी है। सीबीआइ गांव में मृतका के भाई और घटनास्थल वाले खेत के मालिक का पॉलीग्राफ कराने के प्रयास में है। अभी तक दोनों इनकार कर रहे हैं।
सीबीआइ पीड़िता के भाई को फोरेंसिक साइकोलॉजिकल टेस्ट के लिए गुजरात लेकर जाएगी। यहां उसका साइकोलॉजिकल एक्सेसमेंट कराया जाएगा। साइकोलॉजिकल एक्सेसमेंट (मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन) में शिकायतकर्ता / अभियुक्तों को विभिन्न काल्पनिक स्थितियों के साथ मामले से संबंधित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रश्न किए जाते हैं।

 

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