हिटलर के कदम पर चीन

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विजेताओं से कभी नहीं पूछा जाएगा कि किया उसने सच कहा था। सत्य मायने नहीं रखता बल्कि जीत मायने रखती है। इस तरह के विचार हिटलर रखा करता था। साल 1939 में गर्मियों के मौसम में हिटलर की मंशा के चलते कई रणनीतिकारों ने देश के अपंग बच्चों को मिटाने के बारे में योजनाएं बनाईं। 18 अगस्त को एक आदेश जारी हुआ जिसमें सभी नर्सों, डॉक्टरों को ये हिदायत दी गई कि वो तीन साल से कम उम्र के उन सभी बच्चों की जानकारी दें, जो मानसिक या शारीरिक अपंगता के शिकार थे। ऐसे बच्चों को छांटकर कुछ विशेष अस्पतालों में भेजे जाने के आदेश दिए गए। लोगों को लगा  कि इन विशेष अस्पतालों में बेहतर इलाज होगा, लेकिन असल में ये उन बच्चों के कत्लखाने थे।

ऐसे ही विचार चीन के शुरू से रहे हैं। कोरोना वायरस का जनक और इंसानियत के कातिल चीन ने सबसे पहले कोरोना वायरस के शिकार अपने देश के लोगों को मरवा दिया। मौत अस्सी लाख से अधिक पहुंची और इसे छुपा लिया। अमेरिका ने शुरू से ही कोरोना के लिए चीन को दोषी ठहराया। चारो ओर से घिरते चीन ने भारत की चार से पांच किमी जमीन पर कब्जा कर लिया। धोखे से भारतीय जवानों पर हमला करके गीदड़ होने का सबूत दिया। अब भारत को हल्का नहीं समझे। जैसा करेगा वैसा भरेगा।

अंत में, मैं भारत सरकार और अन्य लोगों से अपील करता हूँ चीनी समान का बहिष्कार करें। मौका मिलने पर इस अधर्मी चीन को सबक सिखाएं।

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