फ़िल्म देखी अंधा कानून, आज सामने

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एक विज्ञापन कानून था। एक मई मजदूर दिवस। दोंनो की कहानी आज साकार हो रही है। संसद में बैठे शीर्ष नेताओं को सत्ता की लालसा रहती है। इसके लिए लोगों की जान की कोई कीमत नहीं समझी गई है। सार्वजनिक यातायात व्यवस्था का उल्लंघन करता है तो कर से सरकारीकरण भरा जाता है। सत्ता डायश खुल्लमखुल्ला कानून को ताक पर रखते हैं तो वाहवाही लूटी जाती है। कोरोना में विधानसभा चुनाव हुए। खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर आयोग और सत्ताधारियों का ध्यान रहा। चुनाव आयोग ने कोरोना को नजरअंदाज किया और भाजपा के दो शीर्ष नेतृत्व में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी पीछे नहीं रहे। सात चरण विधानसभा चुनाव में जमकर आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।राजनीतिक दलों की भीड़ बढ़ाने पर प्राथमिकता हो रही है। कोरोनावायरस को नजरंदाज किया गया। इसका परिणाम आज देश की जनता को मौत, आर्थिक नुकसान और सदियों में आई गिरावट से चुकानी पड़ रहा है।

चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में सात चरण में विधानसभा चुनाव कराने की जरूरत पड़ गई है। जबकि आयोग की नजर में स्पष्ट था कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। सात चरण के चुनाव के दौरान ज्यादातर रैली होगी। अपने समर्थन में रैली की सफलता के लिए सभी आचार संहिता का उल्लंघन होगा और ऐसा ही हुआ। रैलियों में मुख नहीं दिखते। कानून की दुहाई देने वाले किसी भी सत्ता और विपक्ष ने लोगों की भीड़ में अक्सर का कोई जिक्र नहीं किया। यह होगा कि क्योंकी सत्ता हासिल करना प्राथमिकता में है। चुनाव के दौरान कोरोनाटे रोगियों का आना शुरू हुआ उसी समय मोदी सरकार का दायित्व लोगों के समुचित उपचार पर रहना चाहिए था। अल ऐसा नहीं हुआ। यह भी पहले जाना था कि भारत और अन्य देशों में पहले कोरोना से उपचार में Whki कमी हो रही है।शायद मोदी सरकार इस पर गर्व करती है तो ऑक्सीजन की खातिर कोरोनाटे रोगियों के काफी संख्या में जान बचाई जा सकती थी। दो दिन पहले एक महिला का निधन हुआ। उन्हें अंतिम संस्कार गंगा घाट पर किया गया। यह आलम था वहां 60 से 70 चिताएं जल रही थी। ऐसा दृश्य पहले किसी ने नहीं देखा था। अगर सरकार ऑक्सीजन और स्वास्थ्य विभाग पर ध्यान रखती तो तो काफी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती थी। जिस तरह से लोगों की मौत हो रही है वह किसी से छिपी नहीं है। अभी प्रमुखों में खमोशी है।

लेखक राजीव शर्मा, जो कई समाचार पत्रों में रिपोर्टर और सीनियर रिपोर्टर रहे हैं। अब ग्रेट न्यूज मॉल के प्रधान संपादक हैं।

 

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